कर्नाटक में 'शिवकुमार युग' की शुरुआत: डीके शिवकुमार ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, कैबिनेट में दिखा सिद्धारमैया का दबदबा
हालांकि, सत्ता की शीर्ष कमान डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपे जाने के बावजूद, नवगठित मंत्रिपरिषद के स्वरूप को देखकर यह साफ हो गया है कि संगठन के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का राजनीतिक सिक्का और प्रभाव अभी भी मजबूती से कायम है। नई सरकार की शुरुआती कैबिनेट में सिद्धारमैया के वफादारों और करीबियों का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के एक प्रमुख दलित चेहरे जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि शुरुआती चरण में कैबिनेट रैंक के मंत्री के रूप में 12 अन्य विधायकों को भी शामिल किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया न केवल अपने गुट के वरिष्ठ विधायकों को मंत्रिपरिषद में तरजीह दिलाने में सफल रहे, बल्कि उन्होंने अपने बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को भी नई कैबिनेट में सुरक्षित स्थान दिलाकर राजनीतिक रूप से पूरी तरह स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही, एमएलसी बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिसकी आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण के कुछ घंटों बाद ही कर दी गई।
मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते ही डीके शिवकुमार पूरी तरह से प्रशासनिक एक्शन में नजर आए। उन्होंने तुरंत अपनी पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए इसे ‘युवा युग’ के आगाज़ का नाम दिया। इस बैठक में युवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसलों पर मुहर लगाई गई। सरकार ने राज्य के सभी स्कूली छात्रों से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त बस पास की सुविधा देने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके साथ ही बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से एक विशेष डिजिटल रोजगार एक्सचेंज पोर्टल स्थापित करने की घोषणा की गई है। युवाओं को सरकारी तंत्र में पारदर्शी अवसर देने के लिए समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी करने और राज्य भर में 10,000 ‘भारत जोड़ो युवा क्लब’ बनाने का फैसला भी लिया गया है। इसके अतिरिक्त, शहरी विकास को गति देने के लिए सड़कों की मरम्मत हेतु 2,000 करोड़ रुपये का विशेष बजट स्वीकृत किया गया है और आवासीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिल्डिंग नियमों में रियायत दी गई है।
नई कैबिनेट के गठन में कांग्रेस आलाकमान ने राज्य के जटिल सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने का पूरा प्रयास किया है। जातीय गणित के लिहाज से कर्नाटक के तीन सबसे प्रभावशाली समुदायों यानी वोक्कालिगा, लिंगायत और अनुसूचित जाति (SC) को प्रतिनिधित्व देते हुए प्रत्येक वर्ग से 3-3 मंत्री बनाए गए हैं। इसके अलावा सिद्धारमैया के अपने कुरुबा समुदाय से 2 मंत्रियों को जगह मिली है, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST), मुस्लिम और ईसाई समुदायों से एक-एक चेहरे को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। हालांकि, शुरुआती सूची में किसी भी महिला विधायक को जगह न मिलने पर राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। राज्य में कुल स्वीकृत मंत्रियों की संख्या 34 है, जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के ठीक बाद कैबिनेट का दूसरा विस्तार किया जाएगा, जिसमें शेष खाली पदों को भरा जाएगा और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर किया जाएगा। फिलहाल, बेंगलुरु के इस भव्य समारोह में एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने यह संदेश दे दिया है कि कांग्रेस दक्षिण के इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
