यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुए अनौपचारिक मतदान में रेबेका ग्रिनस्पैन को 10 सकारात्मक वोट, एक नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और वर्तमान में यूएनसीटीएडी की महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के आधार पर शुरुआती चरण में मजबूत स्थिति बनाई है।
गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सात उम्मीदवारों में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें नौ सकारात्मक वोट, दो नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। हालांकि सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो ने आधिकारिक तौर पर मतदान के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन राजनयिक सूत्रों के जरिए वोटों की जानकारी सामने आई।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद पहले एक उम्मीदवार का चयन करती है, जिसे बाद में महासभा के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। परंपरा के अनुसार महासभा आमतौर पर सुरक्षा परिषद की सिफारिश को स्वीकार कर लेती है। उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और स्थायी सदस्यों की सहमति जांचने के लिए सुरक्षा परिषद में कई दौर के अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित किए जाते हैं।
इस प्रक्रिया में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका बेहद अहम होती है। किसी उम्मीदवार को अंतिम समर्थन हासिल करने के लिए यह जरूरी होता है कि स्थायी सदस्य उसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करने की स्थिति में न हों। अंतिम दौर के मतदान में स्थायी सदस्यों के रुख को अलग-अलग रंगों वाले बैलेट के जरिए समझा जाता है।
इस दौड़ में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे स्थान पर रहे। अर्जेंटीना से आने वाले ग्रॉसी को दो नकारात्मक वोट मिले। उन्होंने यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर रूस की आलोचना की थी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से अलग रुख भी अपनाया था। इसके अलावा चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट भी प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उन्हें पांच नकारात्मक वोट मिले।
सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा भी इस दौड़ में शामिल हैं। एस्पिनोसा को केवल दो नकारात्मक वोट मिले, जबकि कई देशों ने उनके पक्ष में कोई स्पष्ट राय नहीं दी, जिससे उनके पास आगे समर्थन जुटाने का अवसर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेबेका ग्रिनस्पैन, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और एस्पिनोसा को महिला महासचिव की मांग और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के मुद्दे से फायदा मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के करीब 80 वर्षों के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। इसके अलावा 1991 में जेवियर पेरेज दे कुएलार के कार्यकाल के बाद से लैटिन अमेरिका को इस शीर्ष पद का प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
यूएन के पूर्व अवर महासचिव और युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री ओलारा ओतुनु भी उम्मीदवारों में शामिल हैं, लेकिन शुरुआती पोल में उन्हें सबसे कम समर्थन मिला। आने वाले दौर के मतदान यह तय करेंगे कि कौन सा उम्मीदवार स्थायी सदस्यों की सहमति हासिल कर अंतिम दौड़ में आगे बढ़ता है।
