बंगाल : घर की दहलीज से विधानसभा तक पहुंचीं रत्ना देवनाथ, बेटी को खोने का दर्द बना ताकत
कौन हैं रत्ना देवनाथ
रत्ना देवनाथ का राजनीति से कोई लंबा अनुभव नहीं था, लेकिन जीवन की एक बड़ी त्रासदी ने उन्हें जनता के बीच खड़ा कर दिया। 54 वर्षीय रत्ना देवनाथ, पति रंजन देवनाथ के साथ रहती हैं और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास लगभग 74 लाख रुपये की संपत्ति है। बेटी के साथ हुई दर्दनाक घटना ने उन्हें व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और इसी उद्देश्य के साथ राजनीति में कदम रखा।
घर की दहलीज से चुनाव के मैदान तक
साल 2024 में आरजी कर अस्पताल में मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इस घटना के बाद सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी ने महिला सुरक्षा को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया और रत्ना देवनाथ को पानीहाट सीट से उम्मीदवार बनाया। यह कदम उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ।
रत्ना के लिए पीएम मोदी ने की रैली
चुनाव प्रचार के दौरान रत्ना देवनाथ ने खुलकर कहा कि उनका संघर्ष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है, क्योंकि पीड़िता के मामले में न्याय की उम्मीदें कमजोर पड़ीं। नामांकन के समय पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाट में रैली कर उनके समर्थन में जनसभा की।
चुनाव परिणाम
इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 293 सीटों में से बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 और लेफ्ट फ्रंट को भी 2 सीटें मिलीं। ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा पाईं।
