September 8, 2026

राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

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नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठन को पुराने तौर-तरीकों से बाहर निकालकर युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब केवल राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय नेताओं के संगठनात्मक काम, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। इस प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया के तहत नेताओं को 10-10 के समूह में इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है।

इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल कर रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नेताओं के कामकाज और उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का विस्तृत कामकाजी रिपोर्ट कार्ड पहले से ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है।

कांग्रेस राष्ट्रीय सचिवों की मौजूदा टीम में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना मौजूदा 60 फीसदी से अधिक सचिवों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की है। कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राष्ट्रीय संगठन में बड़ी संख्या में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों के आने की संभावना है।

चयन प्रक्रिया में ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर चुके नेताओं को विशेष प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहता है, जिन्होंने संगठन के साथ सीधे जमीन पर काम किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को करीब से समझा है।

राहुल गांधी लंबे समय से कांग्रेस में युवा नेतृत्व और प्रतिभा आधारित चयन की पैरवी करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में इंटरव्यू आधारित चयन की प्रक्रिया इसी सोच का हिस्सा रही है। अब प्रदेश और जिला स्तर पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद राष्ट्रीय संगठन में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

कांग्रेस का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से आने वाले ऐसे नेताओं की टीम तैयार करना है, जो सक्रिय हों, संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों और जमीनी स्तर पर काम का अनुभव रखते हों। राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

करीब दो दशक से राहुल गांधी कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम के चयन की मौजूदा प्रक्रिया को उनके इसी ‘जनरेशन चेंज’ अभियान को संगठनात्मक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने और कामकाज के तरीके में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।

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