June 19, 2026

आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

0
17-1781517806
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है।

मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *