July 16, 2026

जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने के प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सरकार इसे कानून के दायरे में की जा रही कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं।

जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखते हुए उनके विध्वंस के आदेश जारी किए हैं। यह विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और सभी निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए हैं।

मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी मामले में कानून से समझौता नहीं करेगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

वहीं विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रति इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुलडोजर की कार्रवाई का चयनात्मक इस्तेमाल कर रही है और गंभीर अपराधों के मामलों में ऐसी सख्ती दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों का सम्मान होना चाहिए और कानून का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए।

जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी, जबकि इसका औपचारिक उद्घाटन वर्ष 2012 में हुआ था। विश्वविद्यालय लगभग 1500 बीघा भूमि में फैला हुआ है। परिसर के लिए खरीदी गई जमीन और निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच कर रही हैं।

बताया जाता है कि मोहम्मद आजम खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों का संबंध भी जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि और निर्माण विवादों से है। इन्हीं मामलों के आधार पर समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। राज्य में वर्ष 2017 के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गति तेज हुई, जिसके बाद कई कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं।

फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस आदेश राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सरकार इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष निष्पक्षता और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक और कानूनी बहस पर भी पड़ सकता है।

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