June 12, 2026

पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

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नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। राउत ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसी जानकारियां और तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके के बीच कथित मुलाकात होने की बात कही जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिका में हुई एक बैठक से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और केवल उनके पास पहुंची सूचनाओं का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय में वह और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में चर्चा बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में इस संगठन की गतिविधियों और अभियानों ने सोशल मीडिया सहित राजनीतिक मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में कथित मुलाकात को लेकर दिया गया बयान तुरंत राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

विवाद बढ़ने के बाद अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संजय राउत के दावे को आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण छात्र हैं और प्रधानमंत्री के सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल स्तर को देखते हुए ऐसी मुलाकात की कल्पना भी करना कठिन है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई तस्वीर सामने आई है तो वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक से तैयार की गई हो सकती है।

दीपके ने कहा कि उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियां किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल उनके विचारों का समर्थन करना चाहता है तो यह उसका निर्णय हो सकता है, लेकिन संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अपुष्ट दावे और तस्वीरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस विवाद में भी दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कथित तस्वीरों और दावों की सत्यता क्या है।

फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि संजय राउत के बयान और अभिजीत दीपके के खंडन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो विवाद की दिशा और प्रभाव दोनों स्पष्ट हो सकेंगे।

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