April 23, 2026

खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग

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नई दिल्ली। तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।

भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल आपत्तिजनक है बल्कि यह राजनीतिक संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाता है। भाजपा का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां जनता को गुमराह करने और माहौल को बिगाड़ने का काम करती हैं।

इस मामले को लेकर भाजपा ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के डर से इस तरह की भाषा का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस विवाद में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि सोच समझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और सरकार पर व्यक्तिगत हमले कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

वहीं भाजपा के एक अन्य नेता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान देश की जनता और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।

विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं था बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के प्रति कथित दबाव की राजनीति को उजागर करना था। उन्होंने कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास कर रही है और यही बात उन्होंने अपने बयान में कही थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती जाती है। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और कई बार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप को बढ़ावा देते हैं।

इस पूरे विवाद ने चुनावी चर्चा का केंद्र बदल दिया है और अब राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गए हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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