July 4, 2026

मुंबई महापौर और पूर्व मेयर के बीच बढ़ा सियासी टकराव, कार्यालय में जबरन प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों की रिकॉर्डिंग के गंभीर आरोप

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नई दिल्ली। मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में राजनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब महापौर रितू तावड़े ने विपक्ष की नेता एवं पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर पर उनके कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करने और संवेदनशील दस्तावेजों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का गंभीर आरोप लगाया। इस घटना के बाद नगर निगम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

महापौर रितू तावड़े का दावा है कि घटना उस समय हुई जब वह शहर में मैनहोल सुरक्षा व्यवस्था और निरीक्षण कार्यों की समीक्षा के लिए कार्यालय से बाहर थीं। उनके अनुसार इसी दौरान पूर्व महापौर बिना पूर्व अनुमति सीधे महापौर के निजी कार्यालय में पहुंचीं और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा कार्यालय परिसर की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल सामान्य निरीक्षण नहीं बल्कि कार्यालय की गतिविधियों की ‘रेकी’ करने जैसा कृत्य था।

महापौर ने कहा कि उनके कार्यालय में प्रवेश के दौरान कर्मचारियों के साथ तीखी बहस भी हुई। आरोप है कि कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि घटना निर्धारित समय पर हुई और उसके डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हैं।

रितू तावड़े ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को प्रशासनिक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। उनके अनुसार किसी भी संवेदनशील कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करना और वहां की रिकॉर्डिंग करना प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इस घटना को नगर निगम की कार्यप्रणाली और संस्थागत व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया।

महापौर ने कहा कि मामले को लेकर संबंधित पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के इतिहास में इस प्रकार की घटना पहले कभी सामने नहीं आई और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी। उनका मानना है कि सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। साकीनाका मैनहोल हादसे के बाद पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था और अब इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। नगर निगम के भीतर भी इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है।

फिलहाल इस मामले में आरोप लगाए गए हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा आगे की प्रक्रिया अपनाई जानी बाकी है। यदि पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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