July 27, 2026

शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, केवल विरोध के आधार पर लाठीचार्ज उचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

0
15-1785139789
नई दिल्ली । नीट पेपर लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई को उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने संकेत दिए हैं कि ऐसे मामलों के लिए पूरे देश में लागू होने वाली एक समान गाइडलाइन तैयार करने की आवश्यकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह विवाद केवल किसी एक स्थान या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। अदालत ने कहा कि विभिन्न राज्यों में दर्ज याचिकाओं और संबंधित मामलों पर एक साथ विचार किया जाएगा ताकि एक समान कानूनी दृष्टिकोण विकसित किया जा सके। इस संबंध में विस्तृत सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसलिए प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई भी लोकतांत्रिक मूल्यों तथा कानून के दायरे में रहनी चाहिए। अदालत का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट और एकरूप प्रोटोकॉल होने से पुलिस, प्रशासन और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान यदि असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो जाते हैं, तो उस स्थिति से निपटने के लिए अलग और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में बनने वाली संभावित गाइडलाइन में ऐसे मामलों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल किए जा सकते हैं, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के बीच अंतर किया जा सके।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पुलिस व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिसकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और संसाधन क्यों उपलब्ध नहीं कराए जाते। अदालत ने माना कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मियों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान यदि किसी भी पक्ष की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग, हिंसा या अन्य प्रकार की ज्यादती के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायसंगत प्रक्रिया तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के आचरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

शीर्ष अदालत की इन टिप्पणियों को प्रदर्शन संबंधी मामलों में भविष्य की न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर एक समान दिशा-निर्देश तैयार किए जाते हैं, तो इससे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और पुलिस की कार्रवाई के मानकों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद मिल सकती है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विषय पर विस्तृत विचार करेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *