October 20, 2026

चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

0
7-1792481905
नई दिल्ली । चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच दुनिया के 27 देशों में रहने वाले 400 से अधिक भारतीय मूल के छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों ने आयोग के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया है। ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक वाले इस बयान में प्रदर्शन के तरीकों पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि ऐसे कदम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता बताई है।

संयुक्त बयान में बाबासाहब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवैधानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सड़कों पर होने वाले अराजकतापूर्ण प्रदर्शनों की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़े। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

बयान में आरोप लगाया गया है कि भारतीय लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा करने की अनुचित कोशिश की जा रही है। इसमें अदालतों में विचाराधीन मामलों को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने और फिर प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर आपत्ति जताई गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का दावा करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके तरीके संवैधानिक शासन को नुकसान न पहुंचाएं। हालांकि, ये बातें बयान जारी करने वाले समूह के आरोप और विचार हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आयोग के विरोध में कई प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों की अगुवाई अभिजीत दीपके कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में उन्हें दो बार हिरासत में भी लिया गया है।

संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर दुख और हैरानी जताई है। उनका कहना है कि कुछ हलकों में चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं करने, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने और संसद के बजाय सड़कों पर आंदोलन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। बयान में कहा गया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के रूप में वे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

हस्ताक्षर करने वाले लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, जापान और सिंगापुर समेत 27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं। इनमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे संस्थानों से जुड़े छात्र, शोधकर्ता और पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

बयान में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है कि हस्ताक्षरकर्ताओं का इन विश्वविद्यालयों से जुड़ा होना संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सहमति या समर्थन का प्रमाण नहीं है। यानी यह बयान इसमें हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का सामूहिक रुख है, न कि इन विश्वविद्यालयों की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य। इस तरह चुनाव आयोग के समर्थन में सामने आए इस बयान ने चुनाव प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और विरोध प्रदर्शनों के तरीकों को लेकर जारी बहस में एक नया पक्ष सामने रखा है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *