लोकसभा में विपक्ष ने पेश किया स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: बहस में गरमाए सांसद, राहुल गांधी की बोलने की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि बजट सत्र में 20 बार राहुल गांधी को बोलने से रोका गया और बार-बार रूलिंग बुक दिखाकर उन्हें रोकने की कोशिश की गई। गोगोई ने स्पीकर पर महिला सांसदों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब में कहा कि विपक्ष के आरोप असत्य हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जब सदन में बोलने आते हैं, कई बार विदेश यात्रा के कारण अनुपस्थित रहते हैं। रिजिजू ने यह भी कहा कि स्पीकर का नेतृत्व देश के लिए गर्व की बात है और उन्हें हटाने की आवश्यकता नहीं।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी सदन में बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी लगातार सच बोलते हैं और यही सत्तापक्ष को पसंद नहीं आता। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि अमेरिका-इजरायल जैसी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर संवेदनशीलता दिखाएं।
डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति पर विवाद
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान डिप्टी स्पीकर न नियुक्त किए जाने का मुद्दा भी गर्माया। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सदन में डिप्टी स्पीकर की कमी संवैधानिक वैक्यूम पैदा करती है। उन्होंने बताया कि पिछली लोकसभाओं में यह पद विपक्ष को दिया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे खाली रखा।
स्पीकर की गैर-मौजूदगी में लोकसभा की अध्यक्षता जगदंबिका पाल ने की, जिन्होंने कहा कि प्रस्ताव की बहस 10 घंटे तक चलेगी और इस दौरान कार्यवाही उनके अधीन होगी। उन्होंने विपक्ष से कहा कि प्रस्ताव से जुड़े विषयों पर ही बहस हो।
सदन में राजनीतिक टकराव
बहस के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। गोगोई ने कहा कि स्पीकर ने राहुल गांधी को बार-बार बोलने से रोका, जबकि भाजपा सांसदों को बिना रोक स्पीकर की अनुमति के बोलने दिया गया। इसके जवाब में रिजिजू ने कहा कि सदन में नियमों के अनुसार कार्यवाही चलाना स्पीकर का अधिकार है।
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी बताया कि स्पीकर ने 18वीं लोकसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को पर्याप्त सवाल पूछने और अपनी बात रखने के अवसर दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद लोकतंत्र की गरिमा को सुरक्षित रखने वाला है और इसे हटाने की कोई आवश्यकता नहीं।
नव भारत शैली निष्कर्ष
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक मोशन नहीं, बल्कि संसद में नियम और लोकतंत्र की मर्यादा को लेकर चल रही बहस है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी टकराव से यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र में हर सदस्य की आवाज सुनी जानी चाहिए। अब बहस के 10 घंटे पूरे होने के बाद स्पीकर पद को लेकर सदन का निर्णय सामने आएगा।
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