May 10, 2026

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर देशभक्ति का संगम, इंदिरा गांधी कला केंद्र में काव्य-संग्रह का भव्य लोकार्पण

0
untitled-1778204896

नई दिल्ली।नई दिल्ली में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य साहित्यिक आयोजन का आयोजन किया गया, जिसने साहित्य और देशभक्ति के संगम को एक नई ऊंचाई दी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल द्वारा संपादित और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘ऑपरेशन सिंदूर: 100 सर्वश्रेष्ठ कविताएं’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने ही की। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. बर्णवाल के रचनात्मक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास साहित्य को नई दिशा देते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और भविष्य में इसकी प्रासंगिकता बनी रह सकती है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सेना अधिकारी कर्नल प्रदीप खरे, वरिष्ठ पत्रकार एवं एंकर सईद अंसारी, हास्य-व्यंग्य कवि सुदीप भोला तथा उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र वत्स उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस काव्य-संग्रह को देशभक्ति और सैन्य शौर्य का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज बताया।
कर्नल प्रदीप खरे ने भारतीय सेना के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना ने बेहद कम समय में दुश्मन के कई ठिकानों को ध्वस्त कर अपनी रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने इस पुस्तक को उस शौर्य गाथा का काव्यात्मक दस्तावेज बताया, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी पढ़ेंगी।
सईद अंसारी ने प्रभात प्रकाशन की राष्ट्रभावना से जुड़ी प्रकाशन परंपरा की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. बर्णवाल ने कई प्रतिभाशाली कवियों को मंच देकर साहित्यिक न्याय का कार्य किया है।
पुस्तक के संपादक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल ने बताया कि ‘एच.बी. पोएट्री’ द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में देशभर के 361 कवियों ने भाग लिया था। इनमें से चयनित 100 कविताओं को इस संग्रह में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य राष्ट्रभावना से जुड़ी रचनाओं को एक मंच देना और उन्हें व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान अनेक कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं का पाठ किया, जिससे पूरा सभागार देशभक्ति के भावों से गूंज उठा। आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि देशभर के 80 से अधिक कवियों को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस साहित्यिक आयोजन ने न केवल कवियों को एक साझा मंच प्रदान किया, बल्कि देशभक्ति, साहित्य और कला के संगम को भी सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। पूरा कार्यक्रम भावनात्मक, प्रेरणादायक और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *