कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन चरणों में विस्तृत बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि संगठन की तीन प्रमुख मांगें थीं जिनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों और एफआईआर को वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नई कानूनी कार्रवाई नहीं किए जाने की गारंटी शामिल थी। उनके अनुसार सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।
संगठन ने यह भी दावा किया कि उसकी एक अन्य प्रमुख मांग उन परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी थी जिन्होंने कथित रूप से नीट विवाद के दौरान अपने परिजनों को खोया। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर भी सरकार के साथ चर्चा हुई और संबंधित मुद्दों पर विचार का आश्वासन मिला। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी साझा करने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर की प्रतियां अगले कुछ दिनों में संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि तय प्रक्रिया के तहत इन मामलों को वापस लेने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार की नीयत पर विश्वास जताते हुए आंदोलन समाप्त कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय इस समझ के साथ लिया गया है कि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आश्वासनों को पूरा करेगी। यदि तय समय में आवश्यक कार्रवाई होती है तो यह संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता मानी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था और अब जब सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता अपनाया है तो संगठन भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए धरना समाप्त कर रहा है। पार्टी के नेताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सभी लंबित मुद्दों पर औपचारिक कार्रवाई पूरी हो जाएगी और आंदोलन से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर मंतर पर कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के जरिए समाधान निकलना सबसे बेहतर रास्ता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर तय समय के भीतर क्या कार्रवाई करती है।
