LPG गैस को लेकर सबसे बड़ी खुशखबरी! 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी पहुंचने वाला है भारत
– दो एलपीजी टैंकर वाले जहाज शिवालिक और नंदा देवी ने किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार

Iran-Israel War 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया में LPG गैस और तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। बीते कुछ दिनों से भारत में एलपीजी गैस सिंलेडर को लेकर संकट छाया हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में एलपीजी गैस की कोई कमी है। इसी बीच एक बड़ी खबर आ रही है कि दो भारतीय जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को पार कर लिया है। बताया जा रहा है कि ये जहाज हजारों मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहे है।
भारत कब पहुंचेगे ?
भारत सरकार ने शनिवार को कहा कि तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर गए हैं और अगले सप्ताह तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज पार किया
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार ने पश्चिम एशिया युद्ध पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान एलपीजी गैस सिंलेडर संकट के बीच अच्छी खबर दी है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में भारतीय ध्वज वाले 24 जहाज थे, जिनमें से दो जहाज (शिवालिक और नंदा देवी) एलपीजी लेकर शनिवार तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर गए और भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भरी है जहाजों में
राजेश कुमार ने आगे बताया कि इन जहाजों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है। इनके आगमन बंदरगाह मुंद्रा और कांडला होंगे, जहां इनके पहुंचने की अनुमानित तिथियां क्रमशः 16 और 17 मार्च हैं। इसके परिणामस्वरूप, अब फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज बचे हैं, जिनमें कुल 611 नाविक सवार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनसे जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
‘घबराहट में बुकिंग करने से बचें’
केंद्र सरकार ने नागरिकों से एलपीजी की घबराहट में बुकिंग और पेट्रोल और डीजल की घबराहट में खरीदारी न करने का भी आग्रह किया। इसी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि वाणिज्यिक सिलेंडरों के संबंध में काफी चर्चा के बाद, एलपीजी की एक निश्चित मात्रा वाणिज्यिक सिलेंडरों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया।
