July 16, 2026

NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न

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नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत को बताया कि पेपर लीक के तार कथित तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल तक पहुंच रहे हैं, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करता है।

CBI के अनुसार, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने NTA के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी वी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

आरोपी के मोबाइल से मिले 36 फोटो, 111 सवाल परीक्षा से मैच
CBI ने आरोपी मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में डिजिटल सबूत पेश किए। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे हुए प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं।

इन तस्वीरों में कुल 132 सवाल लिखे हुए थे। CBI ने जब इन प्रश्नों का मिलान NTA के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया तो इनमें से 111 सवाल NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच पाए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मोबाइल फोन के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से करीब 10 दिन पहले खींची गई थीं। CBI का कहना है कि ये हस्तलिखित नोट्स कथित तौर पर मोटेगांवकर की लिखावट में हैं।

5 लाख रुपये की डील और रकम बरामद
CBI ने अदालत को बताया कि कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी वी कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच के अनुसार, इसी दौरान गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

जांच एजेंसी ने बताया कि प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद कर ली गई है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

विवाद के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद NTA ने 12 मई को 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित की गई थी। CBI की जांच में सामने आए इन नए तथ्यों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

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