August 2, 2026

सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

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नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

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