August 24, 2026

महाराष्ट्र में अचानक बदला कैबिनेट मीटिंग का दिन, फडणवीस की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सियासी अटकलें तेज

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मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में सोमवार को बैठकों का दौर देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नियमित तौर पर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक को इस बार एक दिन पहले सोमवार को बुलाया है। इसके बाद महायुति के प्रमुख नेता वर्षा बंगले पर बैठक करेंगे और फिर गठबंधन के नेताओं के लिए डिनर रखा गया है। बैठकों के इस कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी है।

हालांकि सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक की तारीख बदलने की वजह मुख्यमंत्री फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताया गया है। लेकिन कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद महायुति के वरिष्ठ नेताओं की बैठक और डिनर के कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं।

कैबिनेट के बाद महायुति नेताओं की बैठक
कैबिनेट की बैठक सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक प्रस्तावित है।

बैठक में फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की मौजूदगी रहेगी। इसके बाद बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के प्रमुख नेताओं तथा गठबंधन के मंत्रियों के लिए डिनर रखा गया है।

सरकारी तौर पर इस बैठक का उद्देश्य गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल बनाना, आपसी मतभेदों को दूर करना और सरकार के कामकाज को गति देना बताया जा रहा है।

बदलाव की अटकलें क्यों?
महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में कैबिनेट बैठक का अचानक एक दिन पहले होना और उसके तुरंत बाद महायुति के शीर्ष नेताओं का साथ बैठना इन अटकलों को और बढ़ा रहा है। हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के कामकाज पर लगातार सक्रियता से नजर बनाए हुए हैं।

सैनी ने वर्षा बंगले पर की फडणवीस से मुलाकात
इस बीच रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। सैनी वर्षा बंगले पहुंचे, जहां फडणवीस ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार भेंट बताया गया है।

अब निगाहें सोमवार को होने वाली कैबिनेट और महायुति नेताओं की बैठकों पर टिकी हैं। इन बैठकों में होने वाली चर्चा और नेताओं के बयानों से ही साफ होगा कि यह महज संगठनात्मक समन्वय की कवायद है या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े फैसले की भूमिका तैयार हो रही है।

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