चार राज्यों में ‘चेहरे’ पर टिकी चुनावी जंग, ममता से लेकर स्टालिन तक की छवि दांव पर
ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव अब तक की सबसे कड़ी परीक्षा माना जा रहा है। चुनावी माहौल बेहद गरम है और समर्थकों का दावा है कि मुकाबला अब ‘ममता बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ जैसा बन गया है। एसआईआर के बाद राज्य में करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। अगर ममता भाजपा को रोकने में सफल रहती हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी INDIA गठबंधन की अगुवाई का दावा मजबूत कर सकती हैं।
महिला वोट बैंक को लेकर भी सियासी रणनीति तेज हो गई है। भाजपा 16-18 अप्रैल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक लाकर ममता की रणनीति को चुनौती देने की तैयारी में है। हालांकि ममता को अब भी अपने महिला और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भरोसा है।
हिमंत बिस्वा सरमा
असम में चुनावी तस्वीर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। कांग्रेस के गौरव गोगोई मुकाबले में हैं, लेकिन ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय हिमंत ने विकास और हिंदुत्व के एजेंडे के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। भाजपा ने 126 में से 103 हिंदू-बहुल सीटों पर फोकस किया है, जबकि 23 मुस्लिम-बहुल सीटों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है। सरमा उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने व्यापक स्वतंत्रता दी है, जैसा कि योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस को मिलता रहा है।
पिनाराई विजयन
केरल में पिनाराई विजयन तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2021 में राज्य की परंपरा तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। एक वामपंथी नेता होने के बावजूद विजयन ने व्यवहारिक राजनीति अपनाते हुए बाजार और केंद्र सरकार के साथ संतुलन बनाकर शासन किया है। उनकी जीत या हार का असर राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथ की स्थिति पर भी पड़ेगा।
एम के स्टालिन
तमिलनाडु में एम के स्टालिन ने खुद को एक सहज और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत स्वीकार्यता बनी हुई है। इस चुनाव में अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) अहम भूमिका निभा सकती है। अगर वह युवाओं और बदलाव चाहने वाले वोटरों का 15% से अधिक समर्थन हासिल करते हैं, तो द्रमुक के लिए त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन सकती है।
बता दें कि मतदान प्रतिशत भी इस बार काफी ऊंचा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, असम में 85%, पुडुचेरी में 90% और केरल में 78% मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं के उत्साह को दर्शाता है।
