लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेनाध्यक्ष, 30 जून को संभालेंगे भारतीय सेना की कमान
नई दिल्ली । भारतीय सेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे और भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। इस नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है तथा संबंधित विभागों को इसकी सूचना भी भेज दी गई है।
भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी और पेशेवर सैन्य शक्तियों में शामिल है। ऐसे में थल सेनाध्यक्ष का पद राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और रक्षा तैयारियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण, सीमाओं की सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के आदेश के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ जनरल के पद पर पदोन्नत होकर थल सेनाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वह सेना की परिचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और सामरिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कमानों और जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक योजना और परिचालन अनुभव के कारण उन्हें सेना के शीर्ष पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना के सामने तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के बढ़ते उपयोग और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। ऐसे में नए सेना प्रमुख का नेतृत्व इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में सेना ने कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीकों को अपनाने और युद्धक तैयारियों को बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब यह जिम्मेदारी नए नेतृत्व के हाथों में जाएगी, जो इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की संस्थागत परंपरा का हिस्सा है, जिससे संगठनात्मक निरंतरता और पेशेवर दक्षता बनी रहती है। नए सेना प्रमुख के नेतृत्व में सेना की दीर्घकालिक रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।
देश की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय सेना की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है। अब सभी की नजर 30 जून पर होगी, जब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ औपचारिक रूप से देश के नए थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
