March 9, 2026

Kerala: स्कूली पाठ्यक्रम में जुड़ेगा नया अध्याय, बच्चों को पढ़ाए जाएंगे राज्यपाल के अधिकार!

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तिरुवनंतपुरम। केरल (Kerala) में प्रदेश सरकार (State Government) और राज्यपाल (Governor) के बीच खींचतान जारी है। इस बीच यहां के शिक्षा मंत्री (Education Minister) ने एक बड़ा ऐलान किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी (Education Minister V Sivankutty) ने कहाकि वह बहुत जल्द ही स्कूल के पाठ्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ने वाले हैं। इसमें राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में बताया जाएगा। यह घोषणा उस घटना के बाद आई है, जिसमें शिक्षामंत्री राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम से निकल आए थे। यह कार्यक्रम प्रदेश की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित किया गया था। शिक्षामंत्री वी सिवनकुट्टी ने डायस पर आरएसएस से जुड़ी भारत माता के पोर्टेट का विरोध किया था।

किस क्लास में होगा लागू
मीडिया से बात करते हुए सिवनकुट्टी ने कहाकि भारत में राज्यपालों के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की व्याख्या करने वाला पाठ इस साल कक्षा 10 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तकों के दूसरे खंड में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अध्याय कक्षा 11 और 12 के छात्रों के पाठ्यक्रम में संशोधन के हिस्से के रूप में पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जाएगा। मंत्री ने आगे कहाकि स्कूल लोकतंत्र के मूल्यों को सीखने के लिए आदर्श जगह हैं। स्कूल का पाठ्यक्रम संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखते हुए संशोधित किया जा रहा है। आज देश में, निर्वाचित राज्य सरकारों को अस्थिर करने के प्रयास बढ़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि राज्यपालों के संविधानिक अधिकार क्या हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तरफ इशारा
मंत्री सिवनकुट्टी का इशारा 8 अप्रैल को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ओर था। इस फैसले ने राज्य के बिल पर फैसले या उन्हें राष्ट्रपति के पास भेजने को लेकर राज्यपालों के लिए एक समय-सीमा निर्धारित की थी। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए भी मंजूरी देने की एक समय सीमा निर्धारित की। राष्ट्रपति ने इस निर्णय पर प्रेसिडेंशियल रेफरेंस मांगा है। शीर्ष अदालत का यह फैसला तमिलनाडु के मामले में आया है। इसमें तमिलनाडु सरकार ने राज्यपाल आरएन रवि के व्यवहार का हवाला दिया था। कई अन्य प्रदेशों में, जहां भाजपा का शासन नहीं है सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव देखने को मिला है। गौरतलब है कि संविधान के तहत राज्यपाल की शक्तियां सीमित हैं।

जब मंत्री सिवनकुट्टी से पूछा गया कि क्या इस निर्णय का संबंध राजभवन के भारत माता चित्र के उपयोग के विवाद से है? इसके जवाब में उन्होंने कहाकि मुझे दृढ़ विश्वास है कि छात्रों को राज्यपालों के कर्तव्यों के बारे में सीखना और समझना चाहिए। इसलिए हमने इस अध्याय को शामिल करने का निर्णय लिया है। यह संविधान का एक हिस्सा है। यह सही है कि गवर्नर बहुत हस्तक्षेप कर रहे हैं। छात्रों को सही चीजें सिखाई जानी चाहिए।

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