July 22, 2026

संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

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नई दिल्ली । राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष के हंगामे और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर जारी गतिरोध के बीच नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है, लेकिन जिस तरह से सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है, उससे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक सहित सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि सरकार पारदर्शी तरीके से काम करने में विश्वास रखती है और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना भी आवश्यक है।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से हंगामे के बजाय चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस विषय पर चर्चा के पक्ष में रही है। चर्चा किस नियम और प्रक्रिया के तहत होगी, इस पर सभी दलों के साथ सहमति बनाई जा सकती है, लेकिन पहले सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलनी चाहिए।

सरकार का कहना है कि युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सरकार अपनी ओर से उठाए गए कदमों और निर्णयों की जानकारी सदन के माध्यम से देश के सामने रखना चाहती है। इसके लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक बताया गया।

जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है और लगातार नारेबाजी के माध्यम से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में बहस, तर्क और संवाद लोकतंत्र की मूल भावना हैं। यदि चर्चा की बजाय व्यवधान को प्राथमिकता दी जाएगी तो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर प्रभावी विमर्श संभव नहीं हो पाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। किसी भी विषय पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान संसदीय प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। उनका मानना था कि जनता की अपेक्षा भी यही है कि संसद में मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मामले पर तत्काल चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह सभी नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं के तहत विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच चर्चा की प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संवाद और बहस के माध्यम से सभी मुद्दों पर अपनी बात रखने तथा विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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