July 11, 2026

भारत में 10 साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, हर दिन 25 स्कूलों पर लगा ताला, छात्रों के नामांकन में गिरावट

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नई दिल्ली। देश में स्कूली शिक्षा को लेकर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में भारत में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा। इस दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में भी 2.26 करोड़ की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट’ के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख थी, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गई। इसी अवधि में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या भी 83 हजार से घटकर 79 हजार हो गई। वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख पहुंच गई।

छात्रों के नामांकन में भी आई बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देशभर के स्कूलों में कुल 26.95 करोड़ छात्रों का नामांकन था, जो 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ रह गया। यानी एक दशक में 2.26 करोड़ छात्रों की कमी दर्ज की गई।

क्यों घट रही है बच्चों की संख्या?
रिपोर्ट में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें घटती प्रजनन दर के कारण स्कूल जाने योग्य बच्चों की संख्या में कमी, कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का आपस में विलय और उच्च कक्षाओं में छात्रों को स्कूल से जुड़े रखने की चुनौती प्रमुख हैं।

स्कूलों के विलय पर उठे सवाल
केंद्र सरकार और नीति आयोग ने संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलय किया है। हालांकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस नीति का असर नामांकन पर भी पड़ा है। उनका तर्क है कि जब गांव या मोहल्ले का नजदीकी स्कूल बंद हो जाता है, तो दूरी बढ़ने के कारण कई बच्चे, खासकर लड़कियां, पढ़ाई छोड़ देती हैं।

बड़ी कक्षाओं में बढ़ रहा ड्रॉपआउट
रिपोर्ट में माध्यमिक स्तर पर बढ़ते ड्रॉपआउट को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक स्कूल छोड़ने की दर सिर्फ 0.3 प्रतिशत है, लेकिन छठी से आठवीं तक यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो जाती है। वहीं नौवीं और दसवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते ड्रॉपआउट दर 11.5 प्रतिशत हो जाती है।

आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर भी 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई है। पुडुचेरी और केरल जैसे राज्यों में यह दर 99.6 प्रतिशत है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई है।

यूपी और एमपी में सबसे ज्यादा स्कूलों का विलय
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे बड़े स्तर पर स्कूलों का विलय किया गया। दोनों राज्यों को मिलाकर करीब 40 हजार स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं।

9वीं के छात्रों की बुनियादी पढ़ाई भी कमजोर
नीति आयोग की रिपोर्ट में छात्रों के सीखने के स्तर को लेकर भी चिंता जताई गई है। अध्ययन में पाया गया कि कक्षा 9 के कई छात्र बीजगणित और ज्यामिति जैसे विषयों के साथ-साथ प्रतिशत, भिन्न और अनुपात जैसी बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को समझने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह शुरुआती कक्षाओं में सीखने की कमियों के आगे तक बने रहने का संकेत है।

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