September 4, 2026

आरजी कर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल, डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर भी बोलीं

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नई दिल्ली ।
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़िता की मां और बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने जांच की प्रगति पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के बाद परिवार को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब भी उन्हें लगता है कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर्याप्त गति से आगे नहीं बढ़ रही है।

बैरकपुर में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रत्ना देबनाथ ने कहा कि वह मूल रूप से राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थीं। उनका परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उनके पति का कारोबार था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने भी उन्हें राजनीति में आने से दूर रहने की सलाह दी थी।

रत्ना देबनाथ के अनुसार, बेटी की दर्दनाक मौत के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। उस समय परिवार को यह भरोसा दिलाया गया था कि सरकार बदलने के बाद राज्य में हालात बेहतर होंगे और मामले में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार बदल गई है तो क्या वास्तव में जमीन पर स्थिति में भी बदलाव आया है।

बीजेपी विधायक ने सीबीआई की जांच को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि वह जांच की वर्तमान प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत की ओर से मामले में नई विशेष जांच टीम गठित किए जाने के बाद भी उन्होंने जांच की दिशा और गति को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने मामले में डॉक्टरों की भूमिका से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल खड़ा किया। रत्ना देबनाथ के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि आरोपी डॉक्टर हैं और उन्हें इस तरह गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में इस तरह की बात सामने आई थी कि डॉक्टरों को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

इस पर रत्ना देबनाथ ने सवाल किया कि यदि कोई डॉक्टर अपराध में शामिल है और उनकी बेटी की हत्या से उसका संबंध सामने आता है तो केवल डॉक्टर होने के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी और परिवार के लिए यह समझना कठिन है कि किसी पेशे से जुड़े व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया में अलग मानक क्यों अपनाया जाए।

रत्ना देबनाथ ने यह भी कहा कि उनका परिवार शुरुआत में राजनीति में शामिल नहीं होना चाहता था। उनकी प्राथमिकता अपनी बेटी के लिए न्याय हासिल करना थी। उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बताई गई थीं और इन्हीं परिस्थितियों के बीच वह सार्वजनिक जीवन में आईं।

आरजी कर मामला अगस्त 2024 में सामने आया था, जब अस्पताल के सेमिनार हॉल में एक महिला डॉक्टर का शव मिला था। घटना के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा तथा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

मामले की जांच को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई चलती रही है। अब पीड़िता की मां के ताजा बयान ने जांच की गति और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। रत्ना देबनाथ ने स्पष्ट किया कि सरकार बदलने के बावजूद उनके परिवार की न्याय की प्रतीक्षा समाप्त नहीं हुई है। उनके बयान से यह भी सामने आया कि परिवार अब भी मामले में व्यापक और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

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