March 8, 2026

हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास

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नई दिल्‍ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)ने कांग्रेस पर एकबार फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह कट्टर भाजपाई (Hardcore BJP)बनने की कोशिश करते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह भूल गए हैं कि वह कांग्रेस से भाजपा (BJP)में आए थे। उन्होंने साल 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

सरमा से जब पूछा गया कि सिर्फ असम नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों में आप भाजपा के गो टू मैन बन गए हैं, अब तो कोई यकीन भी नहीं करता कि आप कांग्रेस से आए हैं। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल का जवाब मजाकिया अंदाज में दिया।

उन्होंने कहा, ‘मैं भी भूल गया हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सबको भूल जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं। पूरा कट्टर बीजेपी बन जाऊं, उसका प्रयास तो होता रहता है।’

क्यों छोड़ी कांग्रेस
सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति के आरोप लगाए थे। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जब से उनके बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए हैं, तब से वह मतलबी हो गए है। खास बात है कि वह कांग्रेस में रहते हुए मंत्री बने थे। वहीं, भाजपा में आने के बाद वह मंत्री बने और बाद में असम के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

असम की सुरक्षा के लिए सामुदायिक रक्षा तंत्र तैयार करें: हिमंत
गुरुवार को सरमा ने लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर रक्षा तंत्र तैयार करें। सरमा ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन लोगों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो कथित तौर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें उन्हें (जो लोग अतिक्रमण करते हैं) आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से ही मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।’

राज्य सरकार ने नगालैंड के साथ राज्य की सीमा पर उरीयमघाट में रेंगमा संरक्षित वन में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया, जिसमें लगभग 11,000 बीघे (लगभग 1,500 हेक्टेयर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती है। सभी को उस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।

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