जीएसटी : 12 व 28% के स्लेब होंगे खत्म, मंत्रियों के समूह ने दी केंद्र के प्रस्ताव को मंजूरी
-
90 फीसदी वस्तुएं होंगी सस्ती
-
विलासिता की वस्तुओं पर होगा 40% कर

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने के लिए राज्यों के मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने 12 और 28% के स्लैब खत्म करने को मंजूरी दे दी। जीओएम ने जीएसटी के सिर्फ दो स्लैन पांच और 18% रखने के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। विलासित को वस्तुएं 40% कर दायरे में आएंगी। अब मामले को
जीएसटी फरिषद की अगली बैठक में रखा जाएगा, जो इस पर अंतिम फैसला करेगी। जिन 99 फीसदी वस्तुओं पर पहले 12% कर लगता था, वे सभी अब 5% वाले स्लैब में आ जाएंगी। इसी तरह, 28% स्लैब वाली 90% वस्तुएं 10% सस्ती हो जाएंगी। जीएसटी में इस बदलाव से मध्य वर्ग, किसानों और एमएसएमई को बड़ी राहत मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सोतारमण के साथ मंत्री समूह की बैठक के बाद जीओएम के संयोजक सप्राट चौधरी ने बताया कि हमने चर्चा के बाद केंद्र सरकार के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है। केंद्र ने पंंच-सात चुनिंदा वस्तुओं पर 40% कर लगाने का भी प्रस्ताव रखता है। जीओएम के कुछ सदस्य चाहते हैं कि महंगी कारों जैसे अल्ट्रा लग्जरी (विलासिता) उत्पादों पर 40% के अतिरिक्त भी कर लगाया जाए। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, केंद्र का प्रस्ताव आम आदमी के हित में है, इसलिए सभी राज्यों ने स्थानत किया है।
अल्ट्रा लग्जरी और समाज के नजरिये से अहितकर वस्तुएं 40% के दायरे में आएंगी। प. बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रेमा भट्टाचार्य ने भी 40% दर के ऊपर अतिरिक्त कर का
प्रस्ताव रखा। अभी जीएसटी में चार स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% हैं। खाद्य पदार्थों पर या तो शून्य या पांच फीसदी जीएसटी लगता है, जबकि विलासिता व अहितकर वस्तुओं पर 28% कर लगता है।
सस्ते होंगे रोजमर्रा के सामान, बढ़ेयी खपत:
जीएसटी के दो स्लैग 5 व 18 फोसदी होने से न सिर्फ रोजमर्य एवं अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें घटेंगी, बल्कि मांग और खपत को बढ़ावा मिलेगा।
राजस्व नुकसान व भरपाई को लेकर चिंता:
जीओएम की बैठक में जीएसटी 2.0 से राजस्व नुकसान, गणना एवं भरपाई पर चिंता जताई गई। प. बंगाल की वित्त मंत्री ने कहा, केंद्र के प्रस्ताव में स्लैब बदलाव से होने वाला राजस्व नुकसान शामिल नहीं है, क्योंकि राज्य को नुकसान का खामियाजा भी आम आदमी को हो भुगतना होगा।
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा, राज्यों के राजस्व की सुरक्षा तय करते हुए दरें तर्कसंगत बनानी चाहिए, अन्यथा गरीब, मध्य वर्ग और बुनियादी परियोजनाओं के साथ कल्याणकारी योजनाओं को नुकसान होगा।
नमकीन, टूथपेस्ट, साबुन, दवाएं होंगी सस्ती:
इन पर टैक्स 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी होगा
12 फीसदी जीएसटी वाली 99 फीसदी वस्तुओं के पांच फोसदी के दायरे में आने से सूखे मेजे, ब्रांडेड नमकौन, टूथ पाउडर, दूधपेस्ट, साबुन, हेयर ऑयल, सामान्य एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, प्रोसेस्ड फूड, स्मैक्स, फ़ोजन सब्जियां, कंडेंस्ड दूध, कुछ मोबाइल, कंप्यूटर, सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर, गीजर जैसी चीजें सस्ती हो जाएंगी।
: इलेक्टिक आयरन, वैक्यूम कलोनर, 1,000 रुपये से अधिक के रेडीमेड कपड़े,500 से 1,000 रुपये तक वाले जूते, बैक्सीन, एच आईवी/टीबी डायग्नोस्टिक
किट, साइकिल, बर्तन पर भी टैक्स कम लगेगा।
: ज्योमेट्री बॉक्स, नक्शे, ग्लोब, ग्लेज्ड टाइल्स, प्री-फैन्रिकेटेड बिल्डिंग, वेंडिंग मशीन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहन, कृषि मशीनरी, सोलर वॉटर हीटर जैसे उत्पाद भी पर भी 5% टैक्स हो जाएगा।
और इन पर 28% से घटकर 18% टैक्स लगेगा
: सीमेंट, ब्यूटी प्रोडक्ट, चॉकलेट, रेडी-मिक्स कंक्रोट, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, एसी, डिशवाॉशर, निजी बिमान, प्रोटीन कन्संट्रेट, चीनी सिरफप, कॉफी कस्संट्रेट, प्लास्टिक प्रोडक्ट, रबर टायर, एल्युमिनियम फॉयल, टेम्पर्ड ग्लास, प्रिंटर, रेजर, मैनिक्योर किट।
: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने रिपोर्ट में कहा, जोएसटो दरों को युक्तिसंगत बनाने से 1.98 लाख करोड़ रुपये के खपत को बढ़ाया पिलेगा। हालांकि, इससे सरकार को हर वित्त वर्ष में 85,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
