April 24, 2026

Ganesh Chaturthi 2025: शुभारंभ हुआ गणेशोत्सव 2025: यह है गणेश चतुर्थी पर रात की पूजा का मुहूर्त

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बाप्पा के स्वागत में हर दिल है तैयार, गणेशोत्सव की शुभ शुरुआत!

बाप्पा के स्वागत में हर दिल है तैयार, गणेशोत्सव की शुभ शुरुआत!

– विघ्नहर्ता के स्वागत में देशभर में उमंग और श्रद्धा की लहर, इस विधि से करें गणपति की उपासना

बाप्पा के स्वागत में हर दिल है तैयार, गणेशोत्सव की शुभ शुरुआत!
                                                                         बाप्पा के स्वागत में हर दिल है तैयार, गणेशोत्सव की शुभ शुरुआत!

Ganesh Chaturthi 2025: आज से गणेशोत्सव की पावन शुरुआत हो चुकी है, और पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति की गूंज सुनाई दे रही है। सुबह से ही घर-घर में गणपति बाप्पा की स्थापना के साथ मंत्रों की मधुर ध्वनि और मोदक की मिठास ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया है।

रात की पूजा का विशेष महत्व: गणेश चतुर्थी की रात को भी उतना ही पवित्र माना गया है जितना दिन का पूजन। मान्यता है कि रात के समय गणपति की आराधना से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। हर किसी को गणेश चतुर्थी पर दिन या दोपहर में भगवान गणेश की पूजा का विधान पता होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी की रात गणपति जी का पूजन कैसे करना चाहिए और क्या क्या शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं।

शुभ मुहूर्त आज रात (Ganesh Chaturthi 2025 raat ka Puja Muhurat)

शुभ मुहूर्त: रात 8:12 बजे से 9:35 बजे तक

अमृत मुहूर्त: रात 9:35 बजे से 10:59 बजे तक

“शुभ मुहूर्त में करें पूजन, बाप्पा लाएंगे जीवन में सुख और समृद्धि।”
                                                                          “शुभ मुहूर्त में करें पूजन, बाप्पा लाएंगे जीवन में सुख और समृद्धि।”

गणेश चतुर्थी पर आज रात भगवान गणेश के लिए पूजन के लिए कई शुभ मुहूर्तों का निर्माण होने जा रहा है, जिसमें खास है रात का चौघड़िया मुहूर्त। चौघड़िया मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त में से एक माना जाता है।

पूजन विधि: (Ganesh Chaturthi 2025 Puja Muhurat)

रात की पूजा में सबसे पहले दीप प्रज्वलित करें, फिर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए गणपति को फूल, दुर्वा और मोदक अर्पित करें। अंत में आरती करें और मन में अपने संकल्प दोहराएं।

गणेश चतुर्थी का महत्व: (Ganesh Chaturthi 2025 Significance)

गणेश चतुर्थी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि विघ्नहर्ता के स्वागत का उत्सव है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तराखंड तक, हर कोना गणपति बाप्पा मोरया की गूंज से सराबोर है। यह दिन हमें बाधाओं से लड़ने, सफलता की ओर बढ़ने और जीवन में शुभता लाने की प्रेरणा देता है। गणपति बाप्पा को विघ्नहर्ता और सिद्धिविनायक के नाम से भी जाना जाता है। यानी वो सभी बाधाओं को दूर करने वाले और सफलता देने वाले देवता हैं। गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर में गणपति बाप्पा को पूरे विधि विधान के साथ स्थापित किया जाता है।

 

 

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