March 8, 2026

छिंदवाड़ा BJP में गुटबाजी: सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव को प्रदेश अध्यक्ष ने किया भोपाल तलब , खींचतान खत्म करने का अल्टीमेटम

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छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर भाजपा के अंदर गुटबाजी ने गंभीर रूप ले लिया है जिसके कारण पार्टी की एकता पर सवाल उठने लगे हैं। लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच चल रहे विवाद को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में तलब किया है। यह बैठक भाजपा के शीर्ष नेताओं हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की उपस्थिति में हुई जहां दोनों नेताओं को एक साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और भविष्य में पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया।

गुटबाजी की यह समस्या छिंदवाड़ा भाजपा की जिला इकाई में लंबे समय से चल रही है। सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार शेषराव यादव की बैठकों में सांसद बंटी साहू शामिल नहीं होते थे और इस दौरान यादव ने साहू के खिलाफ बयानबाजी भी की थी। यह विवाद जिले में जिला कार्यकारिणी गठन पदों के बंटवारे और अन्य संगठनात्मक फैसलों को लेकर और भी गहरा गया था।

भोपाल में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं से कहा कि भाजपा ने छिंदवाड़ा में लंबे संघर्ष के बाद सफलता हासिल की है लेकिन वर्तमान स्थिति पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने दोनों नेताओं से अपील की कि वे पार्टी हित में मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर काम करें क्योंकि पार्टी की छवि और भविष्य की सफलता इसके ऊपर निर्भर है। इस बीच संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने मध्यस्थता करते हुए दोनों नेताओं को चेतावनी दी कि अगर खींचतान तुरंत खत्म नहीं की गई तो पार्टी को इसका भारी नुकसान हो सकता है।

भा ज पा सूत्रों के अनुसार बैठक सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने पार्टी के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि यह देखना बाकी है कि इस विवाद के समाधान के बाद पार्टी के अंदर का माहौल कैसे बनता है और आगामी चुनावों में पार्टी को इसका कितना लाभ होता है। यह घटनाक्रम भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है क्योंकि छिंदवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण जिले में आंतरिक मतभेद पार्टी की भविष्यवाणी और चुनावी रणनीति पर असर डाल सकते हैं।

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