लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी
घटना के बाद शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौतों की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि भगदड़ थी। प्रशासन के अनुसार बिजली का पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह ने भीड़ में अचानक डर पैदा कर दिया।
बताया गया कि हादसे के समय अशोक धाम मंदिर में सावन सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान अशोक धाम हाल्ट के आसपास एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों के आने के कारण वहां लोगों की आवाजाही और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी बीच कुछ युवकों के भागने से अफरा-तफरी और तेज हो गई।
इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और वहां करंट फैल गया है। प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और संबंधित तार कवर किया हुआ था। इसके बावजूद अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू कर दिया।
अचानक मची भगदड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाओं की कतार रही। भीड़ के दबाव में दबने से आठ महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की सहायता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की पहचान तथा उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।
जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में भीड़ बढ़ने, ट्रेनों के एक साथ आने, बिजली के पोल गिरने और अफवाह फैलने सहित सभी पहलुओं को देखा जाएगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश व्यवस्था के दौरान किन परिस्थितियों में दबाव अचानक बढ़ा।
अशोक धाम मंदिर सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ जुटती है। ऐसे में हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित आवाजाही और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की स्थिति किस क्रम में बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।
