March 8, 2026

आर्थिक सर्वेक्षण 2026: निर्मला सीतारमण संसद में पेश करेंगी, बजट से पहले होगी चर्चा का केंद्र

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नई दिल्ली । बजट से पहले केंद्र सरकार गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पेश करेंगी। यह सर्वे केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले पेश किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है।

जीडीपी ग्रोथ और आर्थिक दिशा पर सबकी नजरें

आर्थिक सर्वेक्षण पर सभी की नजरें चालू वित्त वर्ष 2025-26 और आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ और विकास के अनुमान पर टिकी रहेंगी। यह दस्तावेज देश की पूरे साल की आर्थिक स्थिति, विकास की गति और मध्यम अवधि के आर्थिक अनुमान का महत्वपूर्ण संकेत देता है।

मीडिया और विशेषज्ञों की राय

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने मीडिया में जारी लेख में रुपए की कमजोरी, भू-राजनीतिक तनाव और अन्य आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय साझा की। उनका कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक रणनीति और विकास रफ्तार पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

संसद का बजट सत्र और राष्ट्रपति का भाषण

इससे पहले बुधवार को संसद का बजट सत्र शुरू हुआ, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के भाषण को व्यापक और दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना और आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्र की साझा आकांक्षा को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करता है।

भारत का विकास और भविष्य का रोडमैप

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में 2026 को ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और देश ने गर्व के कई पल देखे हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले दशक में हर बड़े सेक्टर में देश ने मजबूत नींव रखी है, जिससे भविष्य में तेज विकास की संभावना और अधिक मजबूत हुई है।

आर्थिक सर्वेक्षण और बजट की तैयारी

राष्ट्रपति के औपचारिक भाषण के बाद संसद का यह अहम दौर शुरू हुआ। इसके बाद 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा। आर्थिक विशेषज्ञों और निवेशकों की नजरें विशेष रूप से जीडीपी ग्रोथ, विकास की दिशा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती पर टिकी हैं।

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