March 8, 2026

राष्ट्रपति के 14 सवालों पर चर्चा.. अरावली से लेकर आवारा कुत्ते तक… 2025 में SC ऐतिहासिक फैसले

0

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कुछ ऐतिहासिक फैसलों (Historic decisions) के साथ 2025 का अंत होने जा रहा है। इन फैसलों में अरावली की परिभाषा (Definition of Aravalli) तय करने से लेकर आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां, निठारी कांड में चौंकाने वाला फैसला, राष्ट्रपति के 14 सवालों पर बेहद जरूरी चर्चा के अलावा बहुत कुछ शामिल है।

दूसरी ओर विधि मंत्रालय ने लगभग 50 पुराने कानूनों को इतिहास के पन्नों में समेट दिया, जिससे रोजमर्रा का कानूनी प्रशासन और सरल और जन-केंद्रित बन गया। मंत्रालय ने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों (एडीआर) को तेज करके लंबित मामलों को कम करने के लिए भी सराहनीय कोशिशें कीं। मंत्रालय ने इस साल न्यायपालिका के प्रति उदार रुख अपनाते हुए खुद सरकार द्वारा दायर किए गए बड़ी संख्या में लंबित मामलों को वापस ले लिया। ज्ञात हो कि अदालतों में सरकार सबसे बड़ी वादी है।


राष्ट्रपति के अहम सवाल

कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका का एक पेचीदा मामला भी इस साल उच्चतम न्यायालय के सामने आया। इसमें मुख्य मुद्दा यह था कि क्या सुप्रीम कोर्ट किसी राज्यपाल को किसी विधेयक (बिल) पर निर्णय लेने का आदेश दे सकती है, जिसे राज्यपाल ने अपने विवेक से रोक कर रखा हो। इस मामले में अनुच्छेद 200 और 201 पर ‘राष्ट्रपति संदर्भ’ के माध्यम से भी राय मांगी गई थी। राष्ट्रपति यह जानना चाहते थीं कि क्या अदालतें राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिये विधेयक पर अपनी सहमति देने की समय-सीमा तय कर सकती हैं। SC ने फैसला सुनाया कि संवैधानिक अधिकारियों को उचित रूप से कार्य करना चाहिए, लेकिन अदालतें उन पर समय-सीमा नहीं थोप सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने यह भी कहा कि राज्यपाल के पास ‘पूर्ण वीटो’ की शक्ति नहीं है और वे अनिश्चितकाल तक विधेयकों को रोक कर नहीं रख सकते। यह फैसला शक्तियों के पृथक्करण और संवैधानिक संतुलन की पुष्टि करता है।


जब दिल्लीवासी थे परेशान..

प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्लीवासियों की नाराजगी और बेबसी के बीच, चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रही दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि बीएस-4 से पुराने वाहनों पर की जाने वाली कार्रवाई पर लगी रोक हटायी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अनुमति दे दी। वहीं इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से परहेज किया, लेकिन दिवाली पर निर्धारित घंटों के दौरान प्रमाणित ‘ग्रीन पटाखों’ के सीमित उपयोग की अनुमति दी।


निठारी कांड में नया मोड़

कुख्यात निठारी कांड में एक और नया मोड़ आया जब SC ने मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को हत्या और कथित तौर पर बच्चों का मांस खाने के आरोप के मामले में किसी विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इससे पहले सह-आरोपी मोनिंदर पंढेर को भी बरी कर दिया गया था।


आवारा कुत्तों पर क्या बोला SC?

आवारा कुत्तों के काटने और हमले के शिकार पीड़ितों के परिवारों और पशु प्रेमियों के बीच चल रही कानूनी जंग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची। SC ने स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले आवारा कुत्तों के हमलों पर चिंता जताई। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शिविरों में स्थानांतरित करने के साथ-साथ उनके नसबंदी और टीकाकरण के निर्देश दिए। जब न्यायालय ने पशु प्रेमियों से पूछा कि अगर वे इतने चिंतित हैं तो वे इन कुत्तों को गोद क्यों नहीं ले लेते, तो पशु प्रेमी रक्षात्मक मुद्रा में नजर आए।


वक्फ मामला पहुंचा SC

वक्फ बोर्ड से संबंधित मामले में, वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें धार्मिक बंदोबस्ती पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण का आरोप लगाया गया था। SC ने अधिनियम के कुछ चुनिंदा प्रावधानों पर रोक लगा दी, जबकि शेष अधिनियम को बहाल कर दिया।


अरावली पर हुआ खूब विवाद

अरावली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणविदों की उस चिंता पर ध्यान दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने चतुराई से नियमों में बदलाव किया है ताकि खनन कंपनियां इस पर्वत श्रृंखला में खनन कर सकें। SC ने अपने पुराने आदेश को पलट दिया जिसमें पिछली समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया गया था और इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को वैसी पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता नहीं है जैसी उच्च पहाड़ियों को है। कोर्ट ने इस विषय पर विशेषज्ञों की अपनी एक नयी समिति बनाने का निर्देश दिया है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *