बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनके बंगाल आने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे थे कि बाबा को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन अब वे बंगाल आ चुके हैं। मंच से सीएम शुभेंदु की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को उनके विचारों, संस्कृति और हिंदुत्व की बातों पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोलकाता का पत्ता-पत्ता ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजेगा।
‘बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं’
सीमा के रास्ते देश में आने वाले लोगों को लेकर भी शास्त्री ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि सीमा के सहारे भारत में घुसने वाले ‘देशद्रोही’ यह बात कान खोलकर सुन लें कि अब यहां बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं। उन्होंने कहा, “छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”
हालांकि, इसी दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध उन लोगों से है जो भारत का खाते हैं और पाकिस्तान का गाते हैं। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में तीनों के पूजा-पद्धति के रास्ते अलग नजर आते हैं, लेकिन अंत में सबका बाप कन्हैया लाल ही निकलता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने बंगाल के लोगों से मिलजुलकर रहने की अपील की और कहा, “कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।”
बॉर्डर इलाकों में कथा करने की इच्छा
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभी हावड़ा में कथा हुई है, लेकिन आगे वह पश्चिम बंगाल के उन इलाकों में भी कथा करना चाहते हैं, जो सीमा से सटे हुए हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में धर्मांतरण अधिक हुआ है। उन्होंने राम और मां काली से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों तक सनातन की आवाज पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से किसी प्रदेश का पूरी तरह कायाकल्प नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए लोगों के भीतर भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने ‘मन परिवर्तन’ पर जोर देते हुए कहा कि जब सनातनी एकजुट होंगे और हर व्यक्ति के मन में राम का भाव जागेगा, तभी बंगाल में वास्तविक रामराज्य की नींव मजबूत होगी।
‘दिक्कत है तो बांग्लादेश चले जाएं’
अपने संबोधन में पड़ोसी देश बांग्लादेश का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिन्हें भारत में रहने में परेशानी महसूस होती है, वे वहां जा सकते हैं। भाषण के अंत में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और न ही वे किसी विशेष राजनीतिक चेहरे के समर्थक हैं। उनका कहना था कि वे पहले भी सनातन के थे, आज भी सनातन के हैं और आगे भी सनातन के ही रहेंगे।
