March 8, 2026

इलाहाबाद उच्च न्यायालय: सिख टिप्पणी मामले में राहुल गांधी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

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Rahul Gandhi

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा दायर एक याचिका पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कांग्रेस सांसद ने इस याचिका में वाराणसी की एक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें सिख समुदाय पर उनकी कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने वाराणसी की अदालत को यह भी निर्देश दिया कि जब तक उच्च न्यायालय अपना फैसला न सुना दे, तब तक वह इस मामले में आगे कोई कार्रवाई न करे।

क्या है : पूरा मामला
बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ जब नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी की एक मजिस्ट्रेट अदालत में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मिश्रा ने आरोप लगाया कि सितंबर 2024 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान गांधी ने एक “भड़काऊ बयान” दिया था जिसमें सवाल किया गया था कि क्या भारत में सिख पगड़ी पहनकर या गुरुद्वारों में जाने में सुरक्षित महसूस करते हैं। उनके अनुसार कांग्रेस सांसद का यह बयान भड़काऊ था और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में सक्षम था।

कोर्ट : पहले याचिका की थी खारिज
मजिस्ट्रेट अदालत ने शुरुआत में मिश्रा की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि चूंकि राहुल गांधी ने यह बयान भारत के बाहर दिया था, इसलिए आगे बढ़ने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक है।

चुनौती: सत्र न्यायालय में दी 
हालांकि मिश्रा ने सत्र न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी, जिसने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया और निचली अदालत को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। सत्र न्यायालय ने माना कि मजिस्ट्रेट ने केवल अनुमति के अभाव के आधार पर याचिका खारिज करके गलती की।

राहुल: खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
बता दें कि इस आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि गांधी की टिप्पणी को संदर्भ से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने दलील दी कि गांधी ने सिख समुदाय से विद्रोह करने या सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आह्वान नहीं किया था।

वकील ने क्या-क्या दी दलीलें
वकील ने कहा- किसी पूरे भाषण से कोई एक वाक्य निकालकर ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आशय को समझने के लिए पूरे भाषण पर विचार किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने तर्क दिया कि विपक्ष के नेता होने के नाते गांधी एक ज़िम्मेदारी भरे पद पर हैं और उनके शब्दों का भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह महत्व है।

यूपी सरकार के वकील ने दलील दी- जब वह विदेशी धरती पर बोलते हैं, तो उसे विपक्ष की सामूहिक आवाज़ के रूप में पेश किया जाता है। उनकी टिप्पणियाँ भड़काऊ और विभाजनकारी थीं।

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