July 6, 2026

'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में जल्द ही एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह कंपनी ‘भारत टैक्सी’ मॉडल की तर्ज पर संचालित होगी और इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की बीमा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों सदस्यों को व्यापक लाभ उपलब्ध कराना होगा।

सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सहकारी जीवन बीमा कंपनी देश के सहकारी आंदोलन को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अच्छा प्रतिसाद मिला है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक करने की योजना है। इसी अनुभव के आधार पर अब बीमा क्षेत्र में भी सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने और बीमा सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको पहले से ही एक जापानी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से बीमा कारोबार से जुड़ी हुई है।

अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है। मंत्रालय ने देशभर की सहकारी संस्थाओं का व्यापक डेटाबेस तैयार किया है, जिससे भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सहकारी तंत्र के विस्तार में मदद मिलेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। यह संस्थान सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करेगा और क्षमता निर्माण के माध्यम से संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में योगदान देगा। उनके अनुसार सहकारी क्षेत्र अब केवल डेयरी, चीनी और उर्वरक उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां तैयार करना है जो पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के विकास को गति दें। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य सरकार ने मंत्रालय पर अपने अधिकार क्षेत्र में दखल देने का आरोप नहीं लगाया है।

समारोह में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित है और इसे संगठित करने के लिए सहकारी व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सहकारिता क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। इनमें 75 हजार टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 नए अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल रहा। इसके अलावा ‘सहकार वन’ परियोजना का भूमिपूजन तथा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं की आधारशिला भी रखी गई।

इस अवसर पर 50 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स प्रणाली से जोड़ने की पहल को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। साथ ही भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम के अंत में डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उपविधियों तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।

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