संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने जताया विरोध, सहमति की कोशिशों के बीच फिर लौटी बैठक
संसद भवन परिसर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों के बीच संवाद स्थापित करना और विधायी कार्यों को लेकर सहमति बनाना था। लेकिन बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद विपक्ष ने बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और विरोध स्वरूप बाहर निकल गया।
विपक्ष का कहना था कि जिन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अलग राजनीतिक समूह का दावा किया है, उन्हें अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। साथ ही उनके खिलाफ दायर अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें सर्वदलीय बैठक में अलग इकाई के रूप में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया, लेकिन बाद में संवाद की आवश्यकता को देखते हुए सभी दल फिर से बैठक में शामिल हो गए। बैठक के दौरान सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। साथ ही आगामी सत्र के दौरान प्रस्तावित विधेयकों, विधायी कार्यक्रम और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए सभी पक्षों से सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि हाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हुई है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति मिलने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। विपक्ष का तर्क है कि अलग बैठने की अनुमति और किसी नए समूह को औपचारिक मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं। इसी कारण सर्वदलीय बैठक में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। इसी तरह अन्य दलों से जुड़े कुछ बागी सांसदों की संसदीय स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन के समक्ष रख सकती है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में सामने आया यह विवाद संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद बैठक में सभी दलों की वापसी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि संवाद की प्रक्रिया को जारी रखने और संसदीय कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है।
