September 11, 2026

Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान

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झांसी। बड़ागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों खुद जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में करीब 20 दिन से पानी भरा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को मुख्य गेट से ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी जमा होने के कारण मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जलभराव की समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। दो बार उच्च अधिकारियों और स्थानीय विधायक को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, उसी अस्पताल परिसर को अपनी समस्या के ‘इलाज’ का इंतजार है।

हर साल होती है जलभराव की समस्या

सीएचसी के सीएमएस डॉ. वैभव पुरोहित ने बताया कि अस्पताल परिसर नीची जगह पर है। आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण हर साल यहां जलभराव की स्थिति बनती है। समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पिछले वर्ष भी स्थायी समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।

प्रसव पीड़ा में पानी से होकर अस्पताल पहुंची गर्भवती

स्थानीय निवासी अनूपा जोशी ने बताया कि 8 सितंबर को उनकी बहू वंदना को प्रसव पीड़ा हुई। मध्यरात्रि करीब दो बजे वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचीं। परिसर में पानी भरा देखकर परेशानी हुई, लेकिन प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण मजबूरी में बहू को पानी से होकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा।

वहीं, वृद्ध मरीज अशोक निरंजन ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें उपचार के लिए सीएचसी जाना पड़ता है। कई दिनों से परिसर में पानी भरा होने के कारण ओपीडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। डॉक्टर ने फॉलोअप जांच के लिए बुलाया था, लेकिन जलभराव के कारण अस्पताल जाने में डर लग रहा है। पानी में गिरने या चोट लगने की आशंका बनी रहती है।

मोटर से पानी निकालने की कोशिश, नहीं मिल रही सफलता

सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि सीएचसी के आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण परिसर में जलभराव होता है। मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है, लेकिन इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि समस्या से बीडीओ को अवगत कराकर इसके स्थायी निदान के लिए कहा गया है।

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