April 24, 2026

Chatra Navratri 9thday: मां सिद्धिदात्री की पूजा में पढ़ें यह आरती, मिलेगी सिद्धि और हर मनोकामना होगी पूरी

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9th day of Navratri

– जानें चैत्र नवरात्र से जुड़ी हर वो बात जो आप जानना चाहते हैं, जय श्रीराम (श्रीराम जन्मोत्सव)

Maa Siddhidatri Aarti: नवरात्रि के नवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में भगवान रुद्र ने सृष्टि निर्माण के लिए आदि-पराशक्ति की पूजा की थी। यह माना जाता है कि देवी आदि-पराशक्ति का कोई रूप नहीं था और वह निराकार थीं। शक्ति की सर्वोच्च देवी, आदि-पराशक्ति, भगवान शिव के बायें आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं।

देवी सिद्धिदात्री की आराधना से समस्त प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में देवी सिद्धिदात्री को तिल या तिल से बने पदार्थों का प्रसाद अर्पित करना चाहिए। इनकी पूजा के लिए सिद्ध गंधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी या ऊँ सिद्धिदात्र्यै नमः मंत्र जपना चाहिए।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

॥ आरती देवी सिद्धिदात्री जी की ॥
जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता।
तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है॥

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥

तू सब काज उसके करती है पूरे।
कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली॥

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा॥

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥

देवी मां को प्रसन्न करने के लिए मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:, महामंत्र का 108 बार जाप करें।

राम नवमी 2026 : ram-navami-2026

एक ओर जहां चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (Chaitra Navratri) को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है, तो दूसरी ओर इस दिन श्री हरि विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। त्रेतायुग में जन्मे, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम का जन्मोत्सव अयोध्या सहित पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

रामचरितमानस के अनुसार श्री राम का जन्म का समय
तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकाण्ड में भगवान श्री राम के जन्म का वर्णन दिया गया है। यह प्रसंग मुख्य रूप से बालकाण्ड के सर्ग 18 और कुछ संस्करणों में सर्ग 19 में दिया गया है।

‘ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः।
ततः चैत्रे नवम्यां तु तिथौ जन्म रघूत्तमः॥‘

रामनवमी 2026 पूजा विधि (Ram Navami 2026 Puja Vidhi)
रामनवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। फिर सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित कर दें। अब पूजा आरंभ करेंगे। सबसे पहले अपने घर के ईशान कोण या फिर पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछा लें और उसमें प्रभु श्रीराम की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। आप राम दरबार भी रख सकते हैं। इसके बाद गंगाजल या चल से आचमन करें।
पीला चंदन, पुष्प, धूप, दीप, फल, माला, वस्त्र आदि चढ़ाने के बाद फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। इसके अलावा आप श्री राम को प्रिय भोग केसरिया खीर चढाएं।
अब घी का दीपक , धूप जलाने के साथ श्री राम मंत्र, राम रक्षा स्तोत्र का पाठ और रामचरितमानस की चौपाइयों या बालकांड का पाठ कर लें।
अंत में भगवान श्रीराम की आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित कर दें और भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

श्री राम आरती ( Shri Ram Aarti)
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

श्री राम मंत्र (Ram Navami 2026 Mantra)
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नमः ||
ॐ क्लीं नमो भगवते रामचन्द्राय सकलजन वश्यकराय स्वाह: ||

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