August 17, 2026

‘दिमागी नक्सल’ बयान पर बीजेपी का चिदंबरम पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख स्पष्ट करने को कहा

0
18-1786957305
नई दिल्ली । ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए संबोधन में नक्सली हिंसा के साथ नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने वाली सोच से सावधान रहने की बात कहे जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की टिप्पणी के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है।

पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाता है तो उन्हें इस संबोधन पर गर्व है। उनके इस बयान को बीजेपी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कांग्रेस की सोच से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के कुछ ही समय बाद चिदंबरम का खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताना राजनीतिक बहस को नया मोड़ देता है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी नक्सलवाद के मुद्दे पर किस रुख के साथ खड़ी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया था। बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह मनमोहन सिंह के पुराने रुख का समर्थन करती है या चिदंबरम की मौजूदा टिप्पणी को सही मानती है।

बीजेपी ने इस बहस को देश में नक्सली हिंसा के पुराने हालात से भी जोड़ा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, एक समय देश के कई हिस्सों में नक्सली गतिविधियों का व्यापक प्रभाव था और बड़ी संख्या में जिले प्रभावित बताए जाते थे। हिंसा के कारण सुरक्षाबलों और आम नागरिकों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की सुरक्षा और विकास संबंधी कोशिशों के बाद नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2026 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी। बीजेपी इसे नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

इस दौरान बस्तर का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना। कभी नक्सली हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाले बस्तर में अब खेल और अन्य सामाजिक गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए बीजेपी ने इसे बदले हुए माहौल का संकेत बताया। त्रिवेदी ने बस्तर ओलंपिक जैसी गतिविधियों का हवाला देकर कहा कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति और विकास की दिशा में बदलाव दिखाई दे रहा है।

विवाद की मूल शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण से हुई थी। उन्होंने कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन ऐसी विचारधारा और सोच से सतर्क रहने की आवश्यकता है जो नक्सली विचारों को बढ़ावा देती हो। इसके बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

अब चिदंबरम की टिप्पणी और बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक तथा राजनीतिक टकराव का नया विषय बन गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस बयान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *