बैंकिंग जगत में हड़कंप: हरियाणा सरकार के 590 करोड़ के गबन पर RBI की पैनी नजर, IDFC फर्स्ट बैंक के शेयर 20% टूटे!
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एक सरकारी विभाग ने अपने खाते को बंद कर धनराशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित Transfer करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों के होश उड़ गए जब उन्होंने पाया कि कागजों पर दर्ज राशि और बैंक खाते के वास्तविक बैलेंस के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। बैंक की आंतरिक जांच में पता चला कि यह गड़बड़ी केवल एक खाते तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसी शाखा से जुड़े कई अन्य सरकारी खातों में भी सेंध लगाई गई थी।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा, विपक्ष ने घेरा
23 फरवरी को हरियाणा विधानसभा में इस घोटाले की गूंज सुनाई दी। विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी कैसे संभव हुई और अब तक दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई है? हुड्डा के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो ACB और विजिलेंस विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, चाहे वह बैंक का कर्मचारी हो या कोई रसूखदार सरकारी अधिकारी, जिसने भी जनता की कमाई पर हाथ साफ किया है, उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
बैंकिंग प्रणाली और बाजार पर असर
घोटाले की खबर सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बैंक का शेयर 20 प्रतिशत तक लुढ़ककर 66.85 रुपये पर आ गया। बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने स्वीकार किया कि यह धोखाधड़ी बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत का परिणाम है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि यह कोई तकनीकी या प्रणालीगत त्रुटि Systemic Error नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जो केवल हरियाणा सरकार के विशिष्ट खातों तक सीमित थी।
RBI की पैनी नजर
भारतीय रिजर्व बैंक RBI भी इस पूरे घटनाक्रम पर सतर्कता बनाए हुए है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि केंद्रीय बैंक इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग सिस्टम में कोई बड़ी “प्रणालीगत समस्या” नहीं है और यह मामला एक विशेष इकाई और ग्राहक समूह तक ही सीमित है।
हरियाणा सरकार ने अब अपनी वित्तीय निगरानी व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की सेंधमारी न हो सके। मुख्यमंत्री के सख्त लहजे ने यह साफ कर दिया है कि सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
