March 10, 2026

आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल

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नई दिल्ली । भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

भारत की प्रमुख भूमिका

भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेशक सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार महानिदेशक सीसीआरएस और डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

WHO के वैश्विक प्रयास

इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा। इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व

बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य-आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

भारत की प्रमुख भूमिका
भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेश सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार सीसीआरएसऔर डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

WHO के वैश्विक प्रयास
इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

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