October 28, 2026

23 साल की अस्मी ने बदली बार काउंसिल की तस्वीर, निर्विरोध जीत के साथ महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बना नया रिकॉर्ड

0
untitled-1793165884

नई दिल्ली। कानून की दुनिया में युवा पीढ़ी की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और इसी कड़ी में 23 साल की अस्मी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर इतिहास रच दिया है। अस्मी को पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल का सदस्य निर्विरोध चुना गया है। उनकी इस जीत को कानूनी क्षेत्र में नई पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है। इतनी कम उम्र में इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचकर अस्मी ने न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा पेश की है जो कानून के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह देश के किसी भी राज्य बार काउंसिल की सबसे युवा सदस्य बन गई हैं और जेन-जी पीढ़ी से इस पद पर पहुंचने वाली पहली सदस्य बताई जा रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर प्रदीप परमार ने अस्मी के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा की। यह पद पहले मिंदरजीत यादव के पास था लेकिन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति होने के बाद यह स्थान खाली हो गया था। इसके बाद इस पद को भरने के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। अस्मी ने चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। सोमवार 26 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक किसी अन्य उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। ऐसे में चुनावी मुकाबले की स्थिति नहीं बनी और मंगलवार को उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

अस्मी की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनके चुने जाने के बाद पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल में महिला सदस्यों का प्रतिनिधित्व देश के राज्य बार काउंसिलों के मुकाबले सबसे अधिक हो गया है। कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय तक कानून के क्षेत्र में वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का प्रभाव अधिक रहा है लेकिन अब युवा वकील भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। अस्मी की सफलता इस बदलाव की एक उल्लेखनीय मिसाल बनकर सामने आई है।

उनके निर्वाचन के बाद बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के अध्यक्ष अमित राणा और उपाध्यक्ष शर्मिला शर्मा समेत अन्य सदस्यों ने उन्हें बधाई दी। अस्मी की जीत से युवा वकीलों के बीच भी उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। बार काउंसिल जैसे संस्थान कानूनी पेशे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में भूमिका निभाते हैं और वकीलों के हितों तथा पेशेवर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। ऐसे में कम उम्र में इस संस्था का सदस्य बनना एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

अस्मी की सफलता यह संदेश देती है कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उम्र से ज्यादा महत्व योग्यता और अवसर का होता है। उनकी उपलब्धि से उन युवाओं को प्रेरणा मिल सकती है जो कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद पेशेवर क्षेत्र में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। हालांकि इस नई जिम्मेदारी के साथ उनसे उम्मीदें भी बढ़ेंगी। अब देखना होगा कि वह बार काउंसिल में अपनी भूमिका निभाते हुए युवा वकीलों की जरूरतों और कानूनी पेशे से जुड़े मुद्दों को किस तरह सामने रखती हैं। फिलहाल उनकी निर्विरोध जीत ने उन्हें देश की कानूनी बिरादरी में एक खास पहचान दिला दी है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *