March 10, 2026

अरुणाभ सेन के विवादित बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भरी सियासी आग, भाजपा नेताओं की पिटाई करेंगे फिर उन्हें..

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नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राज्य की सियासत में लगातार तनाव और बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हावड़ा जिले के बागनान विधायक अरुणाभ सेन का एक कथित विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। वीडियो में अरुणाभ सेन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल करते हुए नजर आ रहे हैं। उनके कथित बयान में यह भी कहा गया कि 2026 विधानसभा चुनाव में वे पहले भाजपा नेताओं की पिटाई करेंगे और फिर उन्हें दफना देंगे।
इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा और TMC के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि चुनावी हार के डर से TMC के नेता खुलेआम हिंसा और धमकी की राजनीति पर उतर आए हैं। भाजपा ने इसे राज्य प्रायोजित हिंसा करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

अरुणाभ सेन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने हिंदी भाषी नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अगर बिहार, उत्तर प्रदेश या ओडिशा से जुड़े नेता बंगाल में आकर बैठक करेंगे, तो वे उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे और स्थानीय नेताओं के घर गिरा देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वे बदला लेने में विश्वास रखते हैं और इस मामले में किसी की नहीं सुनेंगे, चाहे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही क्यों न मना करें।

अरुणाभ सेन के इस विवादित बयान के बाद बागनान और आसपास के इलाके में राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और कानूनी रास्ते से इसका जवाब देंगे। उनका कहना है कि इस तरह के बयान लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हैं और ऐसे कृत्य चुनाव प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है। I-PAC कार्यालय और इससे जुड़े लोगों पर छापेमारी के बाद TMC और केंद्र सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है। TMC नेताओं का आरोप है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि ED का दावा है कि वह भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।

वहीं, विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के खिलाफ लड़ाई होगा।

उनका दावा है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को जेल भेजा जाएगा और राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अरुणाभ सेन के विवादित बयान और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने चुनावी वातावरण को और अधिक सत्ता संघर्ष और तनावपूर्ण बना दिया है। आगामी दिनों में राज्य की सियासत में बयानबाजी, विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले अरुणाभ सेन का विवादित बयान, भाजपा का पलटवार, ED की जांच और नेताओं की तीखी बयानबाजी ने राज्य की सियासत को और गरम कर दिया है। इस विवाद के चलते न केवल स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा है, बल्कि पूरे राज्य का चुनावी माहौल भी प्रभावित हो रहा है। जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि आने वाले महीनों में यह सियासी टकराव किस दिशा में बढ़ता है और चुनाव परिणाम पर इसका क्या असर पड़ता है।

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