March 8, 2026

सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस राष्ट्र सेवा सर्वोपरि राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री ने वीर पूर्व सैनिकों के अदम्य साहस को किया नमन

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नई दिल्ली। देश की सीमाओं की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर योद्धाओं के सम्मान में बुधवार को सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस Armed Forces Veterans Day गौरवपूर्ण तरीके से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के लाखों पूर्व सैनिकों उनके परिवारों और वर्तमान में सेवा दे रहे सैन्यकर्मियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। नेताओं ने देश की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने में उनके बलिदान को शाश्वत प्रेरणाकरार दिया।राष्ट्रपति का संदेश: समर्पण और समर्थन का आह्वान तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सके माध्यम से वीर सैनिकों को सलाम किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा पूर्व सैनिक दिवस पर मैं हमारे पूर्व सैनिकों की बहादुरी समर्पण और बलिदान को सलाम करती हूं। उनका अटूट साहस हर भारतीय को निरंतर प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह दिन केवल श्रद्धांजलि देने का नहीं बल्कि पूर्व सैनिकों को सार्थक और ठोस समर्थन देने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्दी उतारने के बाद भी हमारे पूर्व सैनिक राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहेंगे।

रक्षा मंत्री का संकल्प कल्याण और गरिमा सर्वोपरि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे वीरों का जीवन साहस सम्मान और स्वयं से पहले राष्ट्र सेवाके संकल्प का जीवंत उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सैनिकों के बलिदान हमारे गणतंत्र की आत्मा की रक्षा करते हैं। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा राष्ट्र की अपने सैनिकों के प्रति कृतज्ञता शाश्वत है। पूर्व सैनिकों सेवारत कर्मियों और उनके परिवारों की गरिमा कल्याण और भलाई के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पूर्ण और अटूट रहेगी। फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा की विरासत का सम्मान सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस का ऐतिहासिक महत्व फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा से जुड़ा है। यह दिन भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल करिअप्पा की सेवानिवृत्ति 14 जनवरी 1953 के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। उनकी सेवाओं को याद करते हुए यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों के प्रत्येक उस सिपाही को समर्पित है जिसने तिरंगे की आन बान और शान के लिए अपना जीवन खपा दिया।

देशभर में आयोजन और आउटरीच कार्यक्रम इस अवसर पर राजधानी दिल्ली सहित देशभर के सैन्य छावनियों और केंद्रों में विशेष आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान करना उनके स्वास्थ्य और पुनर्वास की सुविधाओं को सुनिश्चित करना और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना था। यह दिन भारतीय नागरिकों को याद दिलाता है कि हमारी शांति और सुरक्षा उन वीरों की ऋणी है जिन्होंने अपनी जवानी और सुख-चैन सीमाओं पर कुर्बान कर दिए।

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