लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह बोले- तेज जांच और त्वरित सजा होगी
उन्होंने बताया कि यह संशोधन वर्ष 2024 में लागू किए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सामने आए परीक्षा घोटालों ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित किया है। इसलिए कानून को और मजबूत बनाकर ऐसी घटनाओं पर निर्णायक रोक लगाने की आवश्यकता महसूस की गई।
विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद संबंधित अदालत को तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना होगा। इस प्रकार किसी भी मामले में घटना से लेकर न्यायिक निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम पांच महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई पक्ष अदालत के फैसले से असंतुष्ट होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचने के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है, जिससे दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
लोकसभा में चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही हैं। विभिन्न राज्यों में समय-समय पर कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। उनका कहना था कि सरकार ऐसे संगठित अपराधों को समाप्त करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार कर रही है ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में रेलवे भर्ती परीक्षा और चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं सहित कई बड़े पेपर लीक मामलों के बावजूद ठोस कानूनी व्यवस्था विकसित नहीं की गई। उनके अनुसार पहले गठित विभिन्न समितियों ने केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिशें की थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन किया और वर्ष 2024 में इस विषय पर व्यापक कानून लागू किया।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों को लगातार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञ समूहों और टास्क फोर्स की अधिकांश प्रमुख सिफारिशों को पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि शेष सुझावों पर भी चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाना भी है।
सरकार का मानना है कि यह संशोधन लाखों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता को मजबूत करेगा। चर्चा के दौरान यह भी दोहराया गया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता या संगठित धोखाधड़ी को अब गंभीर अपराध माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित संशोधन से छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
