March 13, 2026

गैस संकट के बीच रसोई में लौटेगा केरोसिन! सरकार ने जारी किया अतिरिक्त कोटा, होटल-रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की छूट

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की घबराहट में हो रही बुकिंग के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सालों बाद मिट्टी के तेल (केरोसिन) का अतिरिक्त कोटा जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, लेकिन लोगों की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति प्रभावित
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। यही समुद्री मार्ग भारत को रोजाना लगभग 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराता है। इसके अलावा देश की करीब 55 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई भी इसी रास्ते से आती है।

होटल और रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की छूट
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों पर पड़ा है। होटल और रेस्तरां को मिलने वाली गैस की सप्लाई कम होने से समस्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने आतिथ्य क्षेत्र को राहत देते हुए बायोमास, आरडीएफ पेलेट और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दे दी है।

घरों के लिए केरोसिन का अतिरिक्त कोटा
घरेलू रसोई में गैस की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने राज्यों को मिलने वाले नियमित एक लाख किलोलीटर के कोटे के ऊपर 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। करीब एक दशक बाद पहली बार मिट्टी के तेल के कोटे में इतनी बढ़ोतरी की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

गैस की जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
बाजार में गैस की कमी की अफवाहों के कारण लोग घबराकर ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम समय 21 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 25 दिन रखी गई है। सरकार का कहना है कि फिलहाल एलपीजी की डिलीवरी का औसत समय करीब 2.5 दिन है और आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई देशों से गैस मंगाई जा रही है।

कभी रसोई की पहचान था मिट्टी का तेल
आज भले ही केरोसिन का नाम सुनकर लोग हैरान हों, लेकिन एक समय यह हर घर की जरूरत हुआ करता था। लालटेन जलाने से लेकर स्टोव पर खाना पकाने तक इसका इस्तेमाल आम था। सरकार की स्वच्छ ऊर्जा नीतियों, बिजली के विस्तार और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन मिलने के बाद धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल कम होता चला गया। यहां तक कि दिल्ली को साल 2014 में देश का पहला केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था। लेकिन अब वैश्विक तनाव के बीच यही पुराना ईंधन एक बार फिर रसोई में वापसी करता दिखाई दे सकता है।

Tags:keroseneLPG Gaslpg gas prices

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