June 19, 2026

एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक से आईटी सेक्टर में मची भारी बिकवाली, निफ्टी आईटी 6 प्रतिशत से अधिक टूटा, इंफोसिस-टीसीएस समेत दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरा

0
10-1781859932


नई दिल्ली ।
वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र से आई कमजोर संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार के आईटी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल एक्सेंचर द्वारा अपने वित्त वर्ष 2026 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती किए जाने के बाद भारतीय आईटी शेयरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। इसके परिणामस्वरूप निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया और पूरे बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया।

शुक्रवार के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा। निवेशकों ने वैश्विक तकनीकी खर्च में संभावित सुस्ती और कॉरपोरेट ग्राहकों द्वारा खर्च कम किए जाने की आशंकाओं के चलते आईटी शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर भारतीय टेक कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें दिनभर भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई।

बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 1,800 अंकों से अधिक फिसलकर अपने दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन इंडेक्स फिर भी भारी नुकसान के साथ कारोबार करता रहा। यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वैश्विक मांग को लेकर निवेशकों की चिंता अभी समाप्त नहीं हुई है।

आईटी कंपनियों में सबसे अधिक दबाव इंफोसिस के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे बड़े नाम भी बिकवाली की चपेट में रहे। मिडकैप आईटी कंपनियां भी इस दबाव से अछूती नहीं रहीं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे शेयरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली।

विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट की प्रमुख वजह एक्सेंचर का संशोधित आउटलुक है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में मजबूत राजस्व दर्ज किया, लेकिन ग्राहकों के खर्च को लेकर बनी अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव को देखते हुए पूरे वर्ष के लिए विकास अनुमान कम कर दिया। इसके अलावा कंपनी की नई बुकिंग्स में भी पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया।

भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार में नकारात्मक धारणा और मजबूत हुई। विदेशी बाजारों में आई इस गिरावट का असर भारतीय निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ा और उन्होंने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली तथा बिकवाली को प्राथमिकता दी।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आईटी क्षेत्र को लेकर सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। हालांकि हालिया गिरावट के बाद कई कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक स्तरों पर पहुंचने लगे हैं, लेकिन यदि आने वाली तिमाहियों में आय वृद्धि के अनुमान और कमजोर होते हैं तो इस सेक्टर पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी कई वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊंचा माना जाता है। ऐसे में निवेशक भविष्य की आय, ऑर्डर बुक और वैश्विक मांग के संकेतों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। आगामी तिमाहियों के कारोबारी प्रदर्शन और प्रबंधन की टिप्पणियां इस क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आईटी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे तथा निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर होती नजर आई। ऐसे माहौल में बाजार की निगाहें अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों की दिशा और तकनीकी सेवाओं की मांग में संभावित सुधार पर टिकी हुई हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *