March 8, 2026

2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी!

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central government) 2029 के आम चुनावों (General elections 2029) से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं (Lok Sabha and State Assemblies) में महिलाओं को 33% आरक्षण (33% reservation for women) देने की योजना पर काम कर रही है। यह आरक्षण नए परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा। इस बारे में जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बुधवार को बताया कि यह योजना पहले से तय समय-सीमा से कहीं पहले लागू की जा सकती है। सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि जनगणना 2026 के बाद, दो चरणों में 1 मार्च 2027 से पहले पूरी की जाएगी। यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद पहली बार जातिगत आंकड़ों को भी शामिल करेगी, जो आगे चलकर परिसीमन की आधारशिला बनेगी।

अब तक माना जा रहा था कि परिसीमन की प्रक्रिया और महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 के आम चुनावों तक ही लागू हो पाएंगे, लेकिन अब 2029 की समय-सीमा को लेकर केंद्र सरकार काफी आक्रामक रूप से योजना बना रही है।

दक्षिणी राज्यों की चिंता भी एजेंडे में
परिसीमन आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती दक्षिणी राज्यों की उस मांग को संतुलित करना होगा, जिसमें कहा गया है कि केवल जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों का निर्धारण उन राज्यों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने 1970-80 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण को प्राथमिकता दी थी। केंद्र सरकार ने इन राज्यों को आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह ने फरवरी में कोयंबटूर में कहा था कि परिसीमन के चलते दक्षिण भारत की कोई भी सीट नहीं छीनी जाएगी।

महिला आरक्षण
सितंबर 2023 में संसद से पारित हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। लेकिन यह आरक्षण परिसीमन के बाद ही लागू किया जा सकता है, क्योंकि संविधान में इसी तरह की व्यवस्था की गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “हम 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने का इरादा रखते हैं। जनगणना जल्द शुरू होगी और हम इसे तीन वर्षों में पूरा करने को लेकर आश्वस्त हैं। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2027 तक जनगणना को टालना और फिर परिसीमन कराना एक योजना का हिस्सा है जिससे तमिलनाडु की संसदीय भागीदारी घटाई जा सके। उन्होंने मांग की कि 1971 की जनगणना आधारित परिसीमन ढांचा 2026 के बाद भी कम से कम 30 वर्षों तक लागू रहना चाहिए।

भविष्य की तस्वीर कैसी होगी?
2019 में कार्नेगी एंडॉवमेंट के अध्ययन के अनुसार, यदि 2026 की अनुमानित जनसंख्या को आधार माना जाए तो लोकसभा की कुल सीटें 848 तक बढ़ सकती हैं, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की 143 सीटें होंगी जहां वर्तमान में 80 है। वहीं, तमिलनाडु की सीटें 39 से 49 और केरल की 20 पर स्थिर रहेंगी, जिससे दक्षिण भारत का प्रतिशत प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

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