October 24, 2026

एलन मस्क के फॉलो किए ऋषभ यादव कौन हैं, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर की कामयाबी से छिड़ी ब्रेन ड्रेन बहस

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नई दिल्ली । दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जिन लोगों को फॉलो करते हैं, उनमें भारतीय मूल के इंजीनियर ऋषभ यादव का नाम भी शामिल है। ऋषभ को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनकी पहचान, पेशेवर उपलब्धियों और अमेरिका में उनके काम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसके साथ ही भारत से प्रतिभाशाली युवाओं के विदेश जाने यानी ब्रेन ड्रेन के मुद्दे पर भी बहस तेज हो गई है।

यह चर्चा तब शुरू हुई, जब सोशल मीडिया यूजर माधव ने सवाल उठाया कि एलन मस्क द्वारा फॉलो किए जाने वाले ऋषभ यादव आखिर कौन हैं। उन्होंने बताया कि मस्क एक्स पर करीब 1,418 लोगों को फॉलो करते हैं और इनमें ऋषभ का नाम भी शामिल है। माधव ने यह भी कहा कि उन्हें पहले लगा था कि ऋषभ भारतीय होंगे, लेकिन उनका सोशल मीडिया अकाउंट अमेरिकी दिखाई देता है। इसके बाद उन्होंने इस इंजीनियर की पहचान जानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चैटबॉट ग्रोक से सवाल किया।

ग्रोक के जवाब के अनुसार, ऋषभ यादव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कोडिंग टूल कर्सर के संस्थापक इंजीनियर हैं। यह टूल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को कोड लिखने और उससे जुड़े काम में सहायता देता है। ऋषभ भारतीय मूल के हैं और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं। वह इससे पहले एप्पल और सिस्को जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। एप्पल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आईफोन के बैक टैप फीचर पर भी काम किया था।

ऋषभ की पेशेवर पृष्ठभूमि और मस्क के साथ उनके जुड़ाव को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कर्सर और स्पेसएक्स के बीच हुए सौदे के बाद ऋषभ ने मस्क से जुड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी स्पेसएक्सएआई में काम शुरू किया। इसी पेशेवर संबंध को मस्क द्वारा उन्हें फॉलो किए जाने की चर्चा से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को फॉलो करना अपने आप में किसी विशेष व्यक्तिगत संबंध का प्रमाण नहीं है।

इस मामले ने भारतीय प्रतिभाओं के विदेश जाने के मुद्दे को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। माधव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने कहा कि भारत की प्रतिभा हर साल अमेरिका चली जाती है। कुछ लोगों ने इसे देश के लिए प्रतिभा पलायन की चुनौती बताया, जबकि अन्य ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की उपलब्धियों को उनकी मेहनत और कौशल का परिणाम माना।

बहस के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों से पढ़ाई करने वाले युवाओं का भी उल्लेख किया गया। कुछ यूजर्स का कहना था कि देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेशों में काम करते हैं और वहां नई तकनीकों तथा कारोबार के विकास में योगदान देते हैं। उनके मुताबिक, इससे भारत में उपलब्ध अवसरों और प्रतिभाओं को रोकने की क्षमता पर सवाल उठते हैं।

दूसरी ओर, कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि केवल देशभक्ति की भावना के आधार पर प्रतिभा पलायन को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए भारत में बेहतर रोजगार, अनुसंधान, तकनीकी विकास, प्रतिस्पर्धी वेतन और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, यदि प्रतिभाशाली युवा देश में रहकर भारतीय कंपनियों और संस्थानों के साथ काम करें, तो उनकी विशेषज्ञता का लाभ घरेलू अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।

ऋषभ यादव की चर्चा इस तरह एक इंजीनियर की पेशेवर पहचान से आगे बढ़कर भारतीय प्रतिभाओं के वैश्विक योगदान और देश में उपलब्ध अवसरों के सवाल तक पहुंच गई है। विदेशों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की सफलता जहां उनकी क्षमता को दर्शाती है, वहीं यह बहस भी महत्वपूर्ण बनी हुई है कि भारत किस तरह अपने युवाओं को देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकता है।

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