यूपीआई बना वैश्विक मिसाल, दक्षिण अफ्रीका ने भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को बताया भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार
दक्षिण अफ्रीका वर्तमान समय में नकदी आधारित लेनदेन को कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस दिशा में वहां की सरकार और वित्तीय संस्थान एक ऐसे राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के विकास की योजना बना रहे हैं जो लोगों को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा सके। इसी संदर्भ में भारत के यूपीआई मॉडल को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जिसने कुछ ही वर्षों में करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और पहुंच है। मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड और बैंक खातों के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली भुगतान प्रक्रिया को बेहद आसान बना देती है। इसके लिए महंगे उपकरणों या जटिल तकनीकी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग सुविधाजनक हो जाता है।
दक्षिण अफ्रीका की सरकार भी ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है, जो नागरिकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान कर सके। इसका उद्देश्य नकदी पर निर्भरता को कम करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार से आर्थिक लेनदेन की गति बढ़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी होंगी।
हालांकि, इस दिशा में दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। देश की बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है और मोबाइल डेटा की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं डिजिटल बुनियादी ढांचे की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। इन कारणों से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना आसान नहीं माना जा रहा है।
इसके बावजूद डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से विस्तार की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वित्तीय तकनीक, डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड भुगतान साधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया तो दक्षिण अफ्रीका आने वाले वर्षों में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।
भारत का यूपीआई पहले ही कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और इसे दुनिया के सबसे सफल रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। इसकी सफलता ने विकासशील देशों को यह दिखाया है कि सीमित लागत में भी व्यापक डिजिटल भुगतान नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका द्वारा इस मॉडल में दिखाई जा रही रुचि भारत की डिजिटल क्षमता और वित्तीय नवाचार की वैश्विक स्वीकार्यता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
