March 8, 2026

केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

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नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

पूंजी की लागत घटाने पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

डेढ़ लाइन का सार:

बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

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